मिथ्यात्वी की किसी भी करणी में संवर धर्म नहीं होता : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

पड़ासली। 03 दिसंबर, 2025

मिथ्यात्वी की किसी भी करणी में संवर धर्म नहीं होता : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, शांतिदूत युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण ने आज प्रातः केलवा के भिक्षु विहार से प्रस्थान किया और ‘अंधेरी ओरी’ पधारे जहां तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य आचार्यश्री भिक्षु ने तेरापंथ के आचार्य के रूप में प्रथम चातुर्मास किया था। पूज्य प्रवर उस स्थान पर भी विराजमान हुए जहां आचार्यश्री भिक्षु चातुर्मास के दौराज विराजमान होते थे। यहां से लगभग बारह किमी. का विहार कर पड़ासली स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। विद्यालय परिसर में आर्हत् वांग्मय पर आधारित अमृत देशना प्रदान करते हुए कहा किा हमारी दुनिया मंे अलग-अलग स्तर, अलग अलग दृष्टिकोण वाले और अलग अलग भूमिकाओं पर जीने वाले आदमी होते हैं। कुछ लोग मिथ्यात्वी-मिथ्या दृष्टि वाले और कुछ सम्यक्तवी सम्यक् दृष्टि वाले होते हैं। दोनों ही प्रवृत्ति करते हैं, परन्तु दोनों की प्रवृत्ति में अन्तर होता है।
आज मार्गशीर्ष शुक्ला त्रयोदशी है और शुक्ला त्रयोदशी परमपूज्य आचार्यश्री भिक्षु की जन्म तिथि भी है उनकी महाप्रयाण तिथि भी है। वर्तमान मंे हम आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष मना रहे हैं। आज हम सुबह केलवा में थे, जो उनसे जुड़ा हुआ क्षेत्र है। आगे बगड़ी, सिरियारी व कंटालिया भी जाना है। आचार्यश्री भिक्षु का एक सिद्धान्त है- मिथ्यात्वी की करणी, मिथ्यात्वी की भी धार्मिक करणी मोक्ष की देश आराधिका होती है। इस संदर्भ मंे जैनों में कुछ मतभेद भी है। मिथ्यात्वी की करणी और सम्यक्तवी की करणी में बहुत अंतर होता है। हमारी मान्यता के अनुसार मिथ्यात्वी कोई भी करणी कर ले, उसके संवर धर्म नहीं हो सकता। संवर धर्म होगा तो सम्यक्तवी के ही होगा। यह दोनों की करणी में बहुत बड़ा अंतर है। सारे मिथ्यात्वी भी एक समान नहीं होते, उनमें भी अंतर होता है। मेरे चिंतन से तीन प्रकार के मिथ्यात्वी हो सकते हैं- एक अभव्य मिथ्यात्वी, दूसरा दुर्लभ बोधि मिथ्यात्वी और तीसरा सुलभ बोधि मिथ्यात्वी। अभव्य मिथ्यात्वी कितनी भी तपस्या कर ले, कितना भी ऊपरी आचाार पालन कर ले, वह मोक्ष में कभी नहीं जा सकता। अभव्य मिथ्यात्वी की करणी में वह क्षमता नहीं है कि वह मोक्ष में ले जाए। हालांकि अभव्य मिथ्यात्वी पुण्यार्जन करके नव ग्रैवेयिक तक जा सकता है। आचार्य भिक्षु ने कहा कि कोई मिथ्यात्वी है और वो तपस्या, स्वाध्याय आदि करता है और निर्मल चित्त वाला है तो ऐसी करणी करने पर उसे धार्मिक लाभ होगा और निर्जरा का लाभ भी होगा, ऐसी करणी मोक्ष की देश अपराधिका हो सकती है। यद्यपि सम्यक्तवी और मिथ्यात्वी के लाभ में अन्तर हो सकता है। मिथ्यात्वी की कोई करणी संसार वर्धिनी भी हो सकती है। 
आचार्यश्री ने कहा कि आज पड़ासली में आना हुआ है। यहां विद्यालय के विद्यार्थियों और लोगों में अच्छा धार्मिक विकास होता रहे। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभाजी ने समुपस्थित जनता को संबोधित किया। स्थानीय तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री अनिल बड़ाला व सभी के संरक्षक श्री गुणसागर जी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। स्थानीय तेरापंथ महिला मंडल ने आचार्यश्री के स्वागत में गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के पश्चात संबोधि उपवन पधारे। वहां स्वल्प कालिक प्रवास के पश्चात् धानीन स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। धानीन से जुड़े श्रद्धालुओं ने आचार्य प्रवर का भावभीना स्वागत किया।