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मंगल भावना सफलतम चतुर्मास की परिसंपन्नता
आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वीश्री रतिप्रभा का मंगलभावना समारोह पुराणा ओसवाल भवन के सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ महाश्रमण अष्टकम के द्वारा तेरापंथ महिला मंडल ने किया। साध्वीश्री रतिप्रभा विशाल जनभेदनी को संबोधित करते हुए कहा चातुर्मास सफल कैसे हो? ज्ञान, दर्शन, चारित्र, तप की विशिष्ठ साधना हो, जो पाया उसका संरक्षण एवं आगे संवर्धन करें। हर चतुर्मास में कुछ नया पाने का संकल्प करें। एक कदम भी बढ़े पर बढ़े जरूर तो चतुर्मास के समय का उपयोग हो सकेगा। अध्यात्म की धरती पर नव - नव रंग भरें। गुरु के इंगितानुसार चलने वाला अपने जीवन मे जरूर सफल होते है। हमने भी इस चतुर्मास को सफल बनाने का प्रयत्न किया और गुरु कृपा से हमे सफलता मिली। भाई बहिनों ने इस पावस को सफलतम बताया। इसमे हम दोनों का ही श्रम बोल रहा था। एक तरफ से सफलता कभी भी नही मिलती। जागरूकता, श्रद्धा नये पाने की ललक से चतुर्मास में नव रंग आता है। जसवल धरा उर्वरा भूमि है, वीर भूमि है, साताकारी क्षेत्र है, छोटा क्षेत्र परन्तु श्रद्धा के रंग से रंगा हुआ है। आगे भी धर्म जागरूकता चलती, आत्मा के उत्थान के उपक्रम चलता रहे। साध्वीश्री कलप्रभा ने कहा तपस्या के क्षेत्र में इस बार भाई बहिंनो ने मानो झड़ी ही लगा दी है। साध्वीश्री मनोज्ञयशा ने कहा मंगलभावना से मंगल ही मंगल होता है। साध्वीश्री पावनयशा ने अपनी जन्मभूमि में मुझे पहला चतुर्मास करने का सौभाग्य मिला और जो मेने मांग की की तपस्या से मेरी खोल भरायें और भाई बहिंनो ने इसमे बहुत अच्छा उत्साह दिया और कर्म निर्जरा के भागी बनाया। इस अवसर पर तेरापन्थ सभा अध्यक्ष भूपतराज कोठारी, ज्ञानशाला प्रभारी डूंगरचन्द सालेचा, अणुव्रत समिति अध्यक्ष महावीर सालेचा, परमाथिक शिक्षण संस्थान संयोजक मोतलाल जीरावला, धनराज तातेड़, उषभराज तातेड़, महेंद्र तातेड़, आदि के द्वारा साध्वीश्री जी खूब अच्छा श्रम करके हर दृष्टि से चतुर्मास को सफलतम बनाने का प्रयास किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संपतराज चौपड़ा ने किया।