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दर्शन कार्यशाला का आयोजन
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के पावन निर्देशानुसार भिक्षु चेतना वर्ष में आराध्य को ज्ञानात्मक श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु साध्वी श्री पुण्ययशा के सान्निध्य एवं महासभा के तत्वावधान में तेरापंथी सभा, राजराजेश्वरी नगर द्वारा तेरापंथ दर्शन कार्यशाला का आयोजन किया गया। साध्वीजी के मुखारविन्द से नमस्कार महामंत्र एवं भिक्षु जप से कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। साध्वी जी ने श्रावकों की अनेक जिज्ञासाओं का समुचित समाधान किया तथा कहा आचार्य भिक्षु के विचार आज भी प्रासंगिक है। आवश्यकता है उन्हें गहराई से जानकर-समझकर ग्रहणकर अपनाने की। स्वामीजी ने धर्मसंघ में जिन मर्यादाओं और अनुशासन का बीजारोपण किया उसी का परिणाम है कि आज तेरापंथ अन्यों के लिए मिसाल बन गया है। चेन्नई से पधारे प्रशिक्षक प्रवक्ता उपासक श्री पदमचंद आंचलिया ने सभी बिन्दुओं को स्पर्श करते हुए धर्म की कसौटी एवं धर्म करने का अधिकारी कौन विषयों का विस्तृत विश्लेषण किया।
उन्होंने बताया कि सब जीवों में मनुष्य जीवन श्रेष्ठ है क्योंकि उसमें ही मोक्ष जाने की योग्यता है। मनुष्य में त्याग मूलक प्रवृत्ति एवं चिंतन करने की क्षमता है। दान एवं दया के लौकिक-लोकोत्तर दोनों पक्षों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा आचार्य भिक्षु ने कभी भी दान का निषेध नहीं किया किन्तु लौकिक-लोकोत्तर की भेद रेखा को स्पष्ट किया। हृदय परिवर्तन में धर्म है, बल प्रयोग अथवा प्रलोभन में नहीं। श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन उपासिका मधु कटारिया द्वारा करवाया गया। सभाध्यक्ष राकेश छाजेड़ ने समागत का स्वागत करते हुए इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला।
साध्वी वर्धमानयशा ने आचार्य भिक्षु एवं तेरापंथ के उद्भव पर जानकारी दी। साध्वी श्री बोधिप्रभा ने तेरापंथ धर्मसंघ की मूर्तिपूजा संबंधित सटीक जानकारी प्रस्तुत की तथा जनमानस में व्याप्त शंकाओं का निवारण किया। प्रवक्ता उपासिका कंचन छाजेड़ ने दान एवं दया तथा उपासिका लता बाफणा ने मर्यादा तथा व्यवस्था विषय पर प्रस्तुति दी। मंच संचालन कार्यशाला संयोजक उपासिका सरोज आर बैद ने किया। सभा के मंत्री गुलाब बाँठिया ने आभार व्यक्त किया,मंगलपाठ द्वारा कार्यक्रम सानंद संपन्न हुआ।