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जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते हैं उनसे घबराएं नहीं
सफलतम सूरत चातुर्मास प्रवास के पश्चात् तेरापंथ भवन, सिटीलाइट से अपनी सहवर्तिनी साध्वियों के साथ मृगसर कृष्णा प्रतिपदा को प्रातः सूर्योदय के साथ ही विहार कर दिया। लग रहा था पूरा सूरत श्रावक परिवार उन्हें शुभकामनाएं देने उपस्थित हो गया। विहार से पूर्व उपस्थित श्रद्धालुओं को साध्वी श्री ने मंगल पाठ का श्राव्य करवाया। विहार के पश्चात प्रथम पड़ाव धरम पेलेस, पारले पॉइंट स्थित किशनलाल, कमला मादरेचा परिवार के निवास स्थान पर किया। जहाँ विहार यात्रा का विशाल जुलूस धर्मसभा में परिवर्तित हो गया। उपस्थित विशाल जन समुदाय को प्रतिबोधित करते हुए प्रो. साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा ने कहा- प्रवेश और प्रस्थान जिन्दगी में होता ही रहता है। लगभग चार महीने पूर्व हमने तेरापंथ भवन में चातुर्मास के लिए प्रवेश किया था। अब हमारा प्रस्थान हो रहा है। हर श्रावक प्रेरणा लें कि जिन्दगी में आने वाले उतार-चढ़ाव में संतुलन रखें। परिस्थितियों से घबराएं नहीं। आत्मविश्वास को जीवित रखने वाला आगे बढ़ जाता है। साध्वी मंगल प्रज्ञा जी ने कहा- आज सूरत का श्रावक श्राविका परिवार हमारे मंगल विहार में साथ चल रहा था, उनकी श्रद्धा भक्ति बोल रही थी। तेरापंथ संघ के श्रावक-श्राविकाएं शक्तिशाली स्तम्भ हैं। हमें सौभाग्य से आचार्य महाश्रमण जी का नेतृत्व आधार मिला है, उनके प्रति हमारी भक्ति रूपी शक्ति निरंतर बढ़ती रहे। जीवन का हर पल उनके प्रति समर्पित रहे। विशेष प्रेरणा प्रदान करते हुए उन्होंने कहा- विनय वात्सल्य की परम्परा घर-परिवारों में प्रवेश हो यह आवश्यक है। सौहार्द-प्रेम से वातावरण आनन्दमय बन जाता है। हर व्यक्ति 'आनन्दो मे वर्षति वर्षति' की भावना करे, अनुप्रेक्षा करे। चित्त चैतन्य में आनन्द की वर्षा होती रहे। साध्वी वृन्द ने- 'सुणता ही रेवां प्रगति री गाथावां' गीत का संगान कर श्रावक परिवार के प्रति आध्यात्मिक शुभकामना दी। किशनलाल मादरेचा, कमला मादरेचा ने स्वागत स्वर प्रस्तुत किया। सम्पूर्ण श्रावक परिवार ने एक स्वर में शुभकामनाएं और कृतज्ञभाव प्रस्तुत किए। तेरापंथ सभा मंत्री महेन्द्र गांधी महेता ने सम्पूर्ण श्रावक समाज की ओर से मंगलकामनाएं व्यक्त की।