कृतज्ञोस्मि का हुआ भव्य आयोजन

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कोलकाता।

कृतज्ञोस्मि का हुआ भव्य आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार ठाणा- 3 के सान्निध्य में चतुर्मास की परिसम्पन्नता पर मंगल भावना समारोह कृतज्ञोस्मि का भव्य आयोजन भिक्षु बिहार में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा कलकत्ता - पूर्वांचल) ट्रस्ट द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशाल संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मनिश्री जिनेश कुमार ने कहा- मनुष्य एक सामाजिक और विकसित प्राणी है। विकास के तीन सूत्र हैं। आरोग्य, बोधि और समाधि। संयम से बोधि, आरोग्य और समाधि प्राप्त होती है। संयम से अनासक्ति का विकास होता है। अनासक्ति का महत्वपूर्ण सूत्र है- पदयात्रा । साधुओं के लिए विहार चर्या को प्रशस्त बताया गया है। संत और सरिता लोक कल्याण के लिए जंगल भ्रमण करते हैं। संतों का आगमन व निर्गमन दोनों ही मंगलकारी होते हैं। संतों का आगमन जहां क्षेत्र के लिए सौभाग्य का सूचक होता है, वहीं प्रस्थान विश्व बंधुत्व का भाव लिए हुए होता है। संतों को एक स्थान पर रोककर नहीं र रखना चाहिए कहावत भी है- बहता पानी निर्मला पड़ा गंदीला होय! साधु तो रमता भला, दाग न लागे कोय- जिस प्रकार बहता पानी निर्मल व स्वच्छ होता है, पड़ा हुआ पानी गंदा और दुर्गन्ध युक्त बन जाता है जिससे अनेक बीमारियों की संभावना रहती है उसी प्रकार सन्त विचरण करते हुए ही अच्छे लगते हैं। मंगल भावना समारोह विनयशीलता, ग्रहणशीलता प्रमोदभावना का सूचक है। चार महीने तक अध्यात्म की गंगा बही, लोगों ने भरपूर लाभ उठाया। हमारी विदाई सद्गुणों की नहीं, अवगुणों की विदाई देना है। मोमबत्ती की तरह स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाशित करें। केश की तरह कोमल, सुई की तरह जोड़ने का कार्य मधु व्यवहार से करते हुए दर्पण की तरह उज्ज्वल रहते हुए स्वयं का आत्मनिरीक्षण कर भवसमुद्र से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर मुनिश्री परमानंद ने कहा- श्रावक समाज का उत्साह चतुर्मास की सफलता का प्रतीक है। संतों का आगमन और विहार दोनों मंगलकारी होते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि श्री कुणाल कुमार के मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर तेरापंथी महासभा के पूर्व अध्यक्ष सुरेश गोयल, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश चण्डालिया, कलकत्ता सभा के अध्यक्ष अजय भंसाली पूर्वांचल सभा के अध्यक्ष संजय सिंघी तथा मुख्य न्यासी बाबूलाल गंघ, अणुव्रत समिति अध्यक्ष अध्यक्ष नवीन दुगड़, तेरापंथ युवक परिषद, पूर्वाचल अध्यक्ष राजीव बोधरा, तेरापंथ महिला मंडल, पूर्वाचल अध्यक्ष बबीता तातेड़, तेरापंथ प्रोफेशनल पूर्वांचल के पूर्व अध्यक्ष विनोद दुगड़, प्रेक्षा फाउंडेशन से सुधा बैंगानी, किशोर मंडल संयोजक कौशल चोरडिया, कन्या मण्डल संयोजिका मोनिका भादाणी ने अपने विचार रखते हुए मंगलभावना व्यक्त की। जैन कला संगम, पूर्वांचल स्वरलहरी, तेरापंथ महिला मंडल ने सुमधुर सामूहिक गीतों से मंगल भावना व्यक्त की। आभार ज्ञापन पंकज डोसी ने व मंच संचालन संगठन मंत्री हंसमुख मूंथा ने किया।