तेरापंथ मेरा पंथ कार्यशाला और स्नेह मिलन का आयोजन

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जोरावरपुरा।

तेरापंथ मेरा पंथ कार्यशाला और स्नेह मिलन का आयोजन

तेरापंथ भवन में आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री बसंत प्रभाजी आदि ठाणा 4 के सानिध्य में तेरापंथ मेरा पंथ कार्य शाला ओर तेरापंथ समाज का स्नेह मिलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत तेरापंथ युवक परिषद ने हमारे भाग्य बड़े बलवान, मिला ये तेरापंथ महान् गीतिका का संगान से किया। साध्वी बसंतप्रभा जी ने कहा हम अपने आप को सौभाग्य शाली मानना चाहिए कि हम जैन कुल में जन्म मिला और जैन कुल में भी तेरापंथ मिलना सोने पे सुहागा वाली बात है। साध्वीश्री ने फरमाया एक गाड़ी चार पहियों से चलती है वैसे ही तेरापंथ संघ में चार पहिये साधु ,साध्वी, श्रावक, श्राविका को माना है इस संघ की एक विशिष्ट बात की एक गुरु की आज्ञा में चलने वाला संघ है गुरु आज्ञा के बिना पता भी नहीं हिलता। साध्वी श्री संकल्प श्री जी ने बताया आचार्य भिक्षु ने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए तेरापंथ धर्म संघ की मौलिक मर्यादाओं का सूजन किया। तेरापंथ धर्म संघ के प्रथम आचार्य भिक्षु को ने खाने को आहार, न रहने को स्थान फिर भी दृढ़ मनोबल के साथ सब विपदाओं को चीर कर तेरापंथ धर्म संघ की एक नई दिशा ओर दशा दिखाने का कार्य किया। साध्वी कल्पमाला जी ने भी एक कविता के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किया और साध्वी रोहित यशा जी ने भी गीतिका का संगान कर अपनी भावना व्यक्त की। तेरापंथ मेरा पंथ कार्यशाला में मुख्य वक्ता राजेंद्र कुमार सेठिया गंगाशहर ओर अनुराज बैद नोखा थे।
अनुराग बैद ने दान के प्रकार और दान देने की बात की जानकारी देते हुए कहा कि दान भी दो प्रकार के होते है एक लौकिक दान और एक लोकोतर दान लौकिक दान का अर्थ है सामान्य व्यक्तियों या साधारण जरूरतमंदों को दिया जाने वाला दान, जो सांसारिक या लौकिक सुख और कल्याण से संबंधित होता है। लोकोत्तर दान का अर्थ है 'लोक से परे' या 'अलौकिक' दान, जो सांसारिक लाभ से बढ़कर आध्यात्मिक या धार्मिक हो। इसमें ज्ञान दान, संयति दान और अभय दान जैसे दान शामिल हैं। मुख्य वक्ता राजेंद्र कुमार सेठिया के अपनी भावना को रखते हुए तेरापंथ मेरा पंथ की कार्यशाला में विस्तृत जानकारी लौकिक धर्म, लोकोतर धर्म, संवर, निर्जरा, दया, साध्य, साधन, संयमी,पुण्य बंध, अभयदान आदि सभी की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मनुष्य के पुण्य का बंध अपने आप नहीं होता है पुण्य का बंध निर्जरा से साथ ही होता है कर्मों की निर्जरा होगी तभी पुण्य कर्म का बंध होता है।
सेठिया ने तेरापंथ धर्म संघ के अनेकों उदाहरण देकर श्रावक समाज को तेरापंथ धर्म संघ की मौलिक मर्यादा और सिद्धांतों के बारे में जानकारी दी। जोरावरपुरा तेरापंथ समाज का स्नेह मिलन प्रतिभोज का भी आयोजन किया गया। समाज के सभी श्रावक समाज ने बहुत ही उत्साह और उल्लास के साथ कार्यशाला में भाग लिया । इंद्र चन्द बैद ने भी अपने भाव व्यक्त किए। महिला मंडल ने भी गीतिका का संगान किया। बाबूलाल बुच्चा ने भी कार्यशाला में शामिल होने वाले सभी महानुभाओं का मधुर शब्दों से साथ स्वागत किया । कार्यशाला का मधुर संचालन मोनिका बुच्चा ने किया।