आचार्य श्री तुलसी के 112वें जन्म दिवस पर विविध आयोजन

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आचार्य श्री तुलसी के 112वें जन्म दिवस पर विविध आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेशकुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक, राष्ट्रसंत आचार्य श्री तुलसी का 112वाँ जन्म दिवस अणुव्रत दिवस के रूप में अणुव्रत समिति कोलकाता व जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा (कलकत्ता - पूर्वाचल ट्रस्ट द्वारा भिक्षु विहार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा- आचार्य श्री तुलसी एक देदीप्यमान सूर्य बनकर आए। संयम और तप में पराक्रम कर वे महर्षि देवर्षि ब्रह्मर्षि कहलाए। उनका जीवन निर्मल व पवित्र था। वे साहित्यकार प्रवचनकार, संगीतकार और संघ के सारथी थे। वे एक महान परिवार्जक थे। उन्होंने मानव उत्थान के लिए प्रेक्षाध्यान , जीवन विज्ञान, अणुव्रत की त्रिपदी दी। नैतिकता, सद्‌भावना और नशामुक्ति का आलोक बांटा। अणुव्रत सुरक्षा कवच है। धर्म और व्यवहार का सेतु है। महाव्रती नहीं बन सकते है तो कम से कम अणुव्रती तो बने। मुनि ने आगे कहा- आचार्य तुलसी का जीवन बहुआयामी था। जैन विश्व भारती पूज्य गुरुदेव का कल्पवृक्ष अभियान है जो सारे संसार को जैन धर्म का संदेश देता है। मुमुक्षु संस्था समण श्रेणी, यूनिवर्सिटी, ज्ञानशाला, उपासक महान संत के अलौकिक अवदान है। विश्व के महान संत ने पद का विसर्जन कर के आश्चर्यजनक कार्य किया जो कुर्सी से चिपके लोगों के लिए प्रेरणा है। असाधारण प्रतिभा के धनी युगदृष्टा, युगसृष्टा, युग प्ररुष, युगचिंतक आचार्य श्री तुलसी के 112वें जन्मदिवस की पुण्य बेला में उनका सुमिरन करता हूं । हे प्रभो ऐसी शक्ति दे जिससे साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहे। मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल,पूर्वांचल ने किया। स्वागत भाषण अणुव्रत समिति कोलकाता के अध्यक्ष नवीन दुगड़ ने दिया। इस अवसर पर महासभा के पूर्व अध्यक्ष सुरेश गोयल, कलकत्ता सभा के पूर्व अध्यक्ष तेजकरण बोथरा, पूर्वाचल सभा के अध्यक्ष संजय सिंधी, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष बबीता तातेड, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष राजीव बोथरा तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण सुराणा ने अपने विचार व्यक्त किये। पूर्वांचल स्वर लहरी के सदस्यों ने सुमधुर गीत प्रस्तुत किए। आभार ज्ञापन सभा मंत्री पंकज डोसी ने किया। संचालन मुनि परमानंद ने किया। इस अवसर पर अच्छी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।