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नमस्कार महामंत्र की कार्यशाला
साध्वी सोमयशाजी ठाणा-3 के पावन सान्निध्य में आज नमस्कार मंत्र की विशेष कार्यशाला अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुई। साध्वीश्री के साथ उपस्थित साध्वी सरलयशा जी तथा साध्वी ऋषि प्रभा जी ने कार्यशाला को और भी अधिक गरिमामय और प्रेरणादायी बनाया। साध्वीश्री ने अपनी मधुर वाणी और गहन आध्यात्मिक अनुभव के माध्यम से उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को नमस्कार मंत्र की महत्ता, उसकी संवेदना और उसके सार्वकालिक प्रभाव के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यशाला की शुरुआत मंगलाचरण और नमस्कार मंत्र के सामूहिक उच्चारण से हुई, जिससे वातावरण में दिव्यता की अनूभूति फैल गई। साध्वी सोमयशाजी ने मंत्र के प्रत्येक पद की अर्थव्यंजना, उसके आध्यात्मिक रहस्य और जीवन में उसके उपयोगी आयामों को सरल एवं प्रभावशाली तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि यह मंत्र साधक के कर्मों का क्षय करता है और आत्मशुद्धि का मार्ग खोलता है। कार्यशाला में ध्यान, स्वाध्याय और अनुभूति आधारित अभ्यास भी शामिल रहे। साध्वीश्री ने उपस्थितजन को मंत्र ध्यान की व्यवहारिक विधि सिखाई—कैसे श्वास के साथ मंत्र का सामंजस्य बैठाया जाए, कैसे मन को एकाग्र कर आंतरिक शांति का अनुभव किया जाए। कई प्रतिभागियों ने इस दौरान गहन शांति, सकारात्मकता और ऊर्जा का अनुभव किया। अंत में साध्वी सोमयशाजी ने नवकार मंत्र को जीवन में नियमित रूप से अपनाने, प्रतिदिन कुछ क्षण ध्यान में बैठने और आत्मानुशासन को मजबूत करने का संदेश दिया। साध्वी ऋषि प्रभा जी ने नमस्कार महामंत्र के माध्यम से आध्यात्मिक सुरक्षा कवच कैसे बनाया जाए, इसका सुंदर और व्यवहारिक स्वरूप समझाया गया।