महामांगलिक अनुष्ठान का आयोजन

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सिकंदराबाद।

महामांगलिक अनुष्ठान का आयोजन

तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद द्वारा महामांगलिक अनुष्ठान भगवान महावीर निर्वाण दिवस, दीपावली एवं नववर्ष के शुभ अवसर पर मंगलकारक–विघ्ननिवारक–सिद्धिप्रदायक महामांगलिक अनुष्ठान का आयोजन युगप्रधान महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी डॉ गवेषणाजीश्री जी ठाणा -4 के सान्निध्य में तेरापन्थ भवन, डी वी कॉलोनी, सिकंदराबाद में हुआ।सिकंदराबाद सभा अध्यक्ष श्री सुशील जी संचेती ने सभी संस्थाओं की तरफ से आए श्रावक श्राविकाओं का स्वागत किया एवं दीपावली एवं नव वर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित की| साध्वी डा. गवेषणाश्री ने कहा- मनुष्य सदा अपने आपको बचाने का प्रयास करता है, विघ्न बाधाओं के निवारण का उपाय खोजता है। वह अपने पौरुष और श्रम को तभी सार्थक और सफल मानता है जब उसका प्रारब्ध कार्य निष्पति तक पहुंच जाता है।
अभीष्ट सिद्धि के लिए बृहद् मंगलपाठ एक मंत्र भी है और शुभकार्य के लिए या भविष्य के लिए की जानेवाली मंगलकामना का भी द्योतक बनें। आज का पहला दिन ही नहीं हर क्षण, हर समय, हर महीना, हर वर्ष हमारे नैतिक कार्यों से शुभ एवं मंगलमय बना रहे। साध्वी मंयकप्रभा ने कहा- संस्कृत का एक सुन्दर सुक्त है- बिना प्रयोजन के मन्द व्यक्ति भी किसी कार्य में प्रवृत्त नहीं होता। तो बुद्धिमान कहलानेवाला व्यक्ति अकारण उसमें क्यों प्रवृत्त होगा। यह सच्चाई है प्रत्येक कार्य के साथ व्यक्ति की अपनी एक कामना जुड़ी हुई है। हर व्यक्ति में मन में चाह है कि हमारा यह वर्ष आनंदमय, मंगलमय, बीते।
इस भावना के पीछे मंत्रों की भी अपनी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। साध्वी मेरुप्रभा जी ने कहा- आज का दिन समीक्षा का है। वर्ष भर में हमने क्या पाया गया खोया उसका चिंतन करना है। जो अवशेष है उसे पूर्णता का संकल्प देना है। पुराणा कैलेण्डर उतारकर नया कैलेण्डर टांग देना ही नया वर्ष का प्रवेश नहीं है। कुछ अतीत का सिंहावलोकन व भविष्य की परिकल्पना का नाम ही नया वर्ष है। साध्वी श्री दक्षप्रभा जी ने गीतिका के माध्यम से नव वर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित की। कार्यक्रम में सभी संस्था के पदाधिकारीगण मौजूद थे| आभार ज्ञापन सिकंदराबाद सभा मंत्री हेमंत जी संचेती ने किया।