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आचार्य श्री तुलसी के १०० वें दीक्षा दिवस पर विविध आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में आचार्य श्री तुलसी दीक्षा शताब्दी समारोह का आयोजन साउथ कलकत्ता श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का विषय-''आचार्य श्री तुलसी दीक्षा शताब्दी और मुमुक्षा का महत्त्व था। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा - भारतीय संस्कृति के देदीप्यमान नक्षत्र आचार्य श्री तुलसी थे। उन्होंने अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान आदि रचनात्मक प्रवृत्तियों के द्वारा जिनशासन व तेरापंथ धर्म संघ को ऊंचाई दी। वे विद्या, विनय, विवेक से संपन्न थे। शम सम श्रम की त्रिवेणी में स्नात थे। वे जीवन दाता, भाग्य विधाता, युगद्रस्टा, युगस्रष्टा, भविष्यदर्शी, सूझबूझ के धनी थे। उन्होंने नारी जागरण के लिए अनेक कार्यक्रम किए I उन्होंने आगम संपादन जैसा दुरूह कार्य करके जिन शासन की विशेष सेवा है।
गुरुदेव तुलसी को कालूगणी का दीप्तिमान चेहरा देखकर व वैराग्य भरी वाणी सुनकर वैराग्य का भाव जागृत हुआ । वि.सं. 1982 पौष बदी पंचमी के दिन कालूगणी के करकमलों से लाडनूं में दीक्षा संपन्न हुई। इस अवसर पर मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। इस अवसर पर तेरापंथी महासभा के पूर्व अध्यक्ष सुरेश गोयल, कलकत्ता सभा के उपाध्यक्ष राकेश संचेती, साउथ कलकत्ता जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष बिनोद कुमार चोरड़िया, मुख्य न्यासी तुलसी कुमार दुगड़, अणुव्रत समिति कोलकाता के अध्यक्ष नवीन दुगड़, तेरापंथ महिला मंडल साउथ की अध्यक्षा बिंदु डागा, तेरापंथ युवक परिषद् साउथ कलकता के अध्यक्ष अंकित दुगड़, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम साउथ कोलकाता के अध्यक्ष नरेन्द्र सिरोहिया ने आचार्य तुलसी दीक्षा शताब्दी के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किये। आभार ज्ञापन साउथ सभा के मंत्री कमल कुमार जैन ने किया।