आचार्य श्री तुलसी के १०० वें दीक्षा दिवस पर विविध आयोजन

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बिड़दी

आचार्य श्री तुलसी के १०० वें दीक्षा दिवस पर विविध आयोजन

परमपूज्य युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी पुण्ययशा जी ठाणा-4 की पावन सन्निधि में आचार्य श्री तुलसी के दीक्षा शताब्दी समारोह का आयोजन बिड़दी स्थित ईमरतलाल देवड़ा के निवास-स्थान पर हुआ।साध्वी श्री ने कहा कि आचार्य तुलसी एक ऐसे लाल थे, उस लाल को पहचाना आचार्य कालू ने! आचार्य तुलसी का जीवन विलक्षण, क्रान्तिकारी था।
उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं साधु-साध्वियों के जीवन का आध्यात्मिक विकास किया। वे विकास की पर्याय थे। आपने युगीन समस्याओं का समाधान दिया। आचार्य तुलसी का जीवन पारस मणि के समान था जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सोना बनता है। वैसे ही आपके चरणों में आने वाले का जीवन स्वर्णिम बन जाता है। आचार्य तुलसी का जीवन एक प्रयोगशाला था जिसका फलित है जीवन विज्ञान, प्रेक्षाध्यान। परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी इसी प्रायोगिकता को और शत्‌गुणित कर रहे है। राजराजेश्वरी नगर के सभाध्यक्ष राकेश छाजेड़, बिड़दी उपसभा के अध्यक्ष कुशल जी देवड़ा, अभातेममं से मधु कटारिया, आचार्य तुलसी के संसारपक्षीय पौत्र पद्‌म जी खटेड़ ने भावाभिव्यक्ति दी। साध्वी वर्धमानयशाजी, बोधिप्रभाजी द्वारा आचार्य तुलसी जीवन-यात्रा पर आधारित शब्द-चित्र की रोचक प्रस्तुति दी गई। कुशल मंच संचालन साध्वी विनितयशा जी ने किया।