आचार्य श्री तुलसी के १०० वें दीक्षा दिवस पर विविध आयोजन

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आचार्य श्री तुलसी के १०० वें दीक्षा दिवस पर विविध आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेशकुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में आचार्य श्री तुलसी दीक्षा शताब्दी के अवसर पर प्रेक्षाध्यान कार्यशाला किया गया। प्रेक्षाध्यान कार्यशाला में संभागियों को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा चेतना को रूपांतरित करने की प्रक्रिया प्रेक्षाध्यान है। चेतना को रुपान्तरित करने की प्रकिया प्रेक्षाध्यान है। प्रेक्षा ध्यान से शारीरिक मानसिक, भावनात्मक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। व आधि, व्याधि, उपाधि से मुक्त होकर परम समाधि को प्राप्त होती है। प्रेक्षाध्यान का अर्थ है,गहराई के साथ देखना, देखना आत्मा का गुण है। आचार्य तुलसी आचार्य महाप्रज्ञजी के आभारी है। जिन्होंने प्रेक्षा ध्यान साधना का महत्वपूर्ण उपक्रम देकर महनीय कार्य किया है। प्रेक्षाध्यान कार्यशाला में उपासक प्रशिक्षक मोहनलाल बोथरा ने प्रेक्षाध्यान के प्रयोग कराए। योगासन अंजु कोठारी ने कराए।