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अंतर शक्ति जगाओ प्रभुवर
अभ्युदय के प्राणदेवता। तुम रत्नाकर हो प्रभाकर हो।
चरणों में प्रणत सारे, त्राण,शरण दिव्यदिवाकर हो।।
ओ क्रांतिदूत। अनुशासन मर्यादा तंत्र कितना प्रखर, तुम्हारा ।
ओ तेरापंथ अवधूत साध्य सोपान अंतकरण सुन्दर तुम्हारा।।
ओ संघ सुमेरु, संघ प्रभावक प्रज्ञा के वातायन खोले।
नई भोर में आज खुशहाली, रोम-रोम में आनंद बोले।।
अंतर शक्ति जगाओ प्रभुवर, कल्पना का कल्पतरु छाये।
श्रेय की दिशा में कदम बढ़ाये जीवन में समरसता आये।।
चिन्म्य चेतन पुंज । भिक्खणनाम है मंगल चमत्कारी।
इतिहास पुरुष महाप्राण भिक्षु लाखों की नैया वारी।।
अनगिन है महाग्रंथ तुम्हारे साहित्य सृजन से पथ दिखलाया।
पल-पल सत्य-सिंधु अवगाहन कर तपसाधना से जीन सरसाया।।
तीन लोक में यशकीर्ति उपशम भावों की सौरभ महके।
त्रिशताब्दी के नव आलोक में गणका कोना-कोना चहके।।