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भगवान पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक का हुआ आयोजन
आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि दीप कुमार जी ठाणा -2 एवं स्थानकवासी संत कमल मुनि (कमलेश) ठाणा -5 के सानिध्य में 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ माधावरम ट्रस्ट द्वारा किया गया। मुनि दीप कुमार जी ने कहा- तीर्थंकर जैन धर्म के मुख्य धुरी होते हैं। 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ ऐतिहासिक पुरुष थे। उनका तीर्थ प्रवर्तन भगवान महावीर से 250वर्ष पहले हुआ। अहिंसा और सत्य की साधना को समाज व्यापी बनाने का श्रेय भगवान पार्श्वनाथ को है। भगवान पार्श्वनाथ अहिंसक परंपरा के उन्नयन द्वारा बहुत लोकप्रिय हुए। इसकी जानकारी हमें उनके लिए प्रयुक्त 'पुरुषादानीय' विशेषण के द्वारा मिलती है। आज के दिन भगवान का वाराणसी में राजा अश्वसेन के महलों में महारानी वामादेवी की कुक्षी से जन्म हुआ। भगवान ने दीक्षा ग्रहण की साधना की उपसर्गों को सहा, मुनि श्री ने आगे कहा -मंत्र शास्त्र में भी भगवान पार्श्व की स्तुति में विपुल मात्रा में मंत्र और स्तोत्र प्राप्त होते हैं। मुनि कमल मुनि ने संदर्भ में कहा- जैन एकता युगकी मांग है। कमल मुनिजी जैन एकता के हिमायती है। समन्यवादी है। तेरापंथ और श्रमणसंघ दोनों के आचार्यप्रवरो के आत्मीय संबंध है। कमल मुनि कमलेश ने कहा- तीर्थकर पार्श्वनाथ ने अहिंसा का पावन संदेश दिया। आज देश- दुनिया से चारों ओर हिंसा का साम्राज्य फैला हुआ उसमें अहिंसा के प्रकाश की बहुत जरूरत है। आचार्य शिवमुनि जी एवं आचार्यश्री महाश्रमण जी दोनों मिलकर जैन एकता का कार्य कर रहे हैं। मुनि काव्य कुमार कुमार जी ने कहा- आज हम एक ऐसे महापुरुष की जन्म जयंती मना रहे हैं जो इस धरती धाम पर एक महामानव के रूप में अवधारित हुए। आज के दिन एक ऐसी महाज्योति प्रज्वलित हुई जिसके तेज से सैकड़ो - सैकड़ो लोगों के कष्टो का नाश हो गया। वह महापुरुष, वह महाज्योति थी भगवान पार्श्वनाथ की। अक्षत मुनि जी ने मुक्तक एवं गीत का संगान किया। कार्यक्रम में मंगलाचरण तेरापंथ नगर, माधवराम की बहनों ने किया। स्वागत भाषण सुरेश रांका ने दिया। आभार ज्ञापन पुखराज चोरडि़या ने किया।