साधु के लिए बहुत बड़ा धन है आचार : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

कंटालिया। 24 दिसंबर, 2025

साधु के लिए बहुत बड़ा धन है आचार : आचार्यश्री महाश्रमण

महामना आचार्य श्री भिक्षु की पावन जन्मभूमि में आचार्य श्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ के महाचरण के दसवें दिन के मुख्य कार्यक्रम में मुख्य मुनि श्री महावीरकुमार जी ने गीत का संगान किया। तत्पश्चात् निर्धारित विषय ‘आचार्य भिक्षु की आचार निष्ठा’ पर साध्वी मुदितयशा जी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता परम पूज्य आचार्य श्री भिक्षु के परंपर पट्टधर, ग्यारहवें अधिशास्ता, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अपनी अमृत देशना प्रदान करते हुए फरमाया कि आगम वाणी में तीन बातें हैं—अहिंसा, संयम और तप। इन तीनों को हम आचार के संदर्भ में भी देख सकते हैं और इनका विश्लेषण भी कर सकते हैं। अहिंसा भी आचार का अंग है, संयम भी आचार है और तप भी आचार से जुड़ा हुआ है। अहिंसा, संयम और तप आचार हैं, साथ ही ज्ञानाचार, दर्शनाचार, चारित्राचार, तपाचार एवं वीर्याचार—इन पंचाचारों का समावेश होता है।
आज का निर्धारित विषय है—‘आचार्य भिक्षु की चारित्र निष्ठा’। साधु के लिए आचार एक बहुत बड़ा धन होता है। आचार्य भिक्षु के अभिनिष्क्रमण का आधारभूत तत्त्व भी आचार पक्ष ही रहा है। वे आचार के प्रबल पक्षधर थे। इसके साथ ही उनमें जो ज्ञानवत्ता और प्रबुद्धता थी, उससे उनका आचार और अधिक निखर कर सामने आया। उनके समय में यदि साध्वियों के पास थोड़ा कपड़ा अधिक निकल जाता, तो आहार-पानी का संबंध तोड़ लेना—आचार के संदर्भ में लिया गया एक कठोर निर्णय था। आचार का पक्ष ऐसा है कि कठिनाइयों की स्थिति में भी आचार की शुद्धता का प्रयास होना चाहिए। जहाँ समुदाय होता है, वहाँ सबका विवेक एक समान हो—यह संभव नहीं होता। किसी से आचार में प्रमाद हो जाए तो उसे उचित समय पर ध्यान दिलाने का प्रयास होना चाहिए। यदि आचार्य में भी कोई प्रमाद दिखाई दे, तो विनम्रता के साथ उनसे भी उचित निवेदन किया जा सकता है। आचार्य भिक्षु की आचार निष्ठा तो हम सभी के लिए अनुकरणीय है। हमें अपने आचार के प्रति छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान देना चाहिए, जिससे आचार और अधिक पुष्ट हो सके।
यह महाचरण हम सभी के ज्ञानवर्धन में सहायक बन रहा है। साधु-साध्वियों एवं समणियों की प्रस्तुतियाँ भी हो रही हैं। हम सभी में भी आचार्य श्री भिक्षु की भाँति आचार संपदा पुष्ट होती रहे और हम पंचाचार में प्रगतिमान रहें—यह काम्य है। आज गुरुदर्शन करने वाली साध्वियों ने संत वृंद से खमतखामणा की। संतों की ओर से मुनि कुमारश्रमण जी ने मंगलकामना व्यक्त की। साध्वी उर्मिलाकुमारी जी ने गुरुदर्शन कर गीत का संगान किया। साध्वी प्रज्ञाश्रीजी ने भी श्रद्धाभिव्यक्ति दी तथा सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया। साध्वी मंगलप्रभा जी एवं साध्वी हेमलता जी ने गीत की प्रस्तुति दी। आचार्य प्रवर ने सभी साध्वियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। परम पूज्य गुरुदेव की सन्निधि में आज महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के छात्र उपस्थित हुए। आचार्य प्रवर की अनुज्ञा से मुख्य मुनि प्रवर ने छात्रों को प्रेरणा प्रदान की। तत्पश्चात् आचार्य प्रवर ने भी विद्यार्थियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए सद्भावना, नैतिकता एवं नशा-मुक्ति का संकल्प स्वीकार कराया। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।