तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का अनुपम आयोजन

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उत्तर चेन्नई।

तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का अनुपम आयोजन

आचार्य भिक्षु के सिद्धांत को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के अंतर्गत उत्तर चेन्नई, चेन्नई सभा द्वारा मुख्य प्रवक्ता उपासक महेंद्र दक की गरिमामय उपस्थिति में इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मंगल शुभारंभ मंगलाचरण से तंडियारपेट की बहनों द्वारा किया गया। तत्पश्चात श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन सभा के संगठन मंत्री सुनील सकलेचा ने किया। उत्तरचेन्नई सभा के अध्यक्ष श्री इंदरचंद जी डुंगरवाल ने स्वागत स्वर प्रस्तुत करते हुए अपने विचारों की अभिव्यक्ति में कहा कि यह कार्यशाला सभी के लिए ज्ञानवान एवं प्रेरणादायक साबित हो ऐसी आशा है ।प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए मंत्री देवीलाल हिरण ने कहा कि आचार्य भिक्षु के 300 वर्ष के उपलक्ष में आयोजित यह कार्यशाला सभी श्रावक श्राविकाओं के लिए बहुत ही उपयोगी है। आपने आचार्य भिक्षु के धर्म क्रांति के बारे में प्रकाश डाला। मुख्य प्रवक्ता उपासक श्री महेंद्र जी दक ने कार्यशाला के प्रथम चरण में तेरापंथ मेरापंथ विषय पर अनेक बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए अपने उद्बोधन में कहां की 'तेरापंथ-मेरापंथ कैसे बने' पूज्य प्रवर ने यह वर्ष भिक्षु चेतना वर्ष के रुप में मनाने का शुभ आशीर्वर दिया है। आचार्य भिक्षु द्वारा दिए गए सिद्धांतों की दैनिक जीवन में क्या उपयोगिता है-इस पर अनेक उदाहरण एवं अनेक सूत्रों द्वारा जानकारी दी गई। तेरापंथ और प्रतिमा पूजा,साध्य-साधन और साधना, पुण्य-पाप की परिभाषा,दान-दया के प्रकार आत्मा को पाप के आचरण से कैसे बचाये, स्वयं की यानि आत्मा की रक्षा स्वयं को स्वार्थी बनकर करना है।
व्यवहारिक पक्ष एवं आध्यात्मिक पक्ष दोनों पक्ष को अलग-अलग समझने का प्रशिक्षण दिया गया।