रचनाएं
वो देवपुरुष मनहार
सत्यता के सैनिक वो देवपुरुष मनहार।
साधना में अनुपम क्षमता निर्मल ज्ञान अपार।।
1. शुद्ध चेतना के धारक लब्धिधर पावन,
मर्यादा के प्रहरी विलक्षण मनभावन।
शुक्ल ध्यान योगीश्वर, शक्ति शांति अनपार ।।
2. अटल आस्था आगम पर ध्येय बनाया,
मृदु वचनों से सबको शिखर चढ़ाया।
घोर विरोधों में भी, शीतल सम रम्याकार।।
3. "आणाए मामगं धम्मं" सूत्र अपनाया,
स्वर्ण सम जीवन को खूब तपाया।
श्रम निष्ठा के रण में, अप्रमाद की बहार ।।
4. एक गुरु का शासन वृक्ष लहलहाया,
ममकार का विसर्जन बोध दिराया।
अर्हम के पुजारी, हर कार्य किया साकार ।।
5. मंगल कल्याणमय का ध्यान जग लगाएं,
चरण युगल में हम शीष झुकाएँ।
सांवरिये का सुमिरण करता भवसागर पार ।।
लय - सावन का महीना