रचनाएं
श्री भीखण की गौरव गाथा
1. एक चमत्कारी बाबा कंटालिया की धरा पर आए।
तेरापंथ का कल्पवृक्ष जिसकी छांव में हम सरसाएँ।।
2. मां दीपा के राज दुलारे बल्लूशाह के कुल उजियारे।
सिंह स्वप्नधारी सिंहपुरुष असहायों के जो सहारे।।
3. अनगिन कष्ट सह फिर भी आर्य भिक्षु नहीं घबराएं।
छाती में मुक्का सिर होला समता दीप प्रभु कहलाए।।
4. कष्टों की कजरारी रातें ज्ञान ध्यान में सदा बिताएँ।
गाली देने वालों पर प्रभु करुणा अमृत रस बरसाए।।
5. रात-2 भर जागे स्वामी श्रावकों को सत्य बताएं।
उस भीखण की गौरव गाथा जितनी गाएं कम रह जाए।।
6. केलवा अंधेरी ओरी श्री भिक्षु का गौरव गाए।
सिरियारी सुखकारी धाम जन मानस के मन को भाएं।।
7. धम्मगिरि पे ध्यान लगाने तपस्विनी सरिता सुहाए।
वज्र छाती वाले बाबा तेरापंथ का ध्वज फहराएं।।
8. शोभजी को आर्यचरण दान दया का पाठ पढ़ाएं।
पटवोजी गेरूलालजी श्रद्धानत सुयश बढ़ाएं ।।
9. कालकूट पीकर के स्वामी कालजयी कर्तृत्व कहाए।
यश सौरभ चारों कूटों में महाश्रमण गुरुवर महकाए।।