रचनाएं
तेरा अनशन है चन्दन
साध्वी विनयश्रीजी (श्रीडुंगरगढ़) ने साधु के तीसरे मनोरथ की आराधना कर संयम जीवन को सफल सुफल किया है। साध्वी विनयश्री जी मेरे बचपन की साथी रही हैं। पा.शि.सं. में हम दोनों की काफी एकरूपता थी। बचपन से ये सहज सरल मृदुभाषी व्यवहार कुशल रहे हैं। साध्वी सोहनां जी लाडनूं के साथ उनके तन की पछेवड़ी बन कर रहे। प्रवचन कौशल अच्छा था। अग्रगामी बनकर भी संघ की अच्छा प्रभावना की। साध्वी जगवत्सलाजी, साध्वी अतुलप्रभाजी साध्वीश्री की सेवा में संलग्न थी। खूब चित्त समाधि पहुंचाई। साध्वी मधुस्मिता जी का भी शुभ संयोग मिल गया। आध्यात्मिक उर्ध्वारोहण यात्रा की मंगल कामना।