जीवन का असली बोध है अनशन

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साध्वी मंजुयशा

जीवन का असली बोध है अनशन

जीवन जीना एक कला है और मृत्यु को महोत्सव का रूप देना महान कला है। मरण को महोत्सव वही व्यक्ति बना सकता है जिसका मनोबल, संकल्प बल एवं आत्मबल मजबूत हो। 'शासनश्री' साध्वी विनयश्री ने लम्बे समय तक संयम की पवित्र साधना की है। जीवन के अंतिम समय में आपने आजीवन अनशन करके संयमी जीवन के तीसरे मनोरथ को सफल किया है। यह आप‌के प्रबल साहस एवं शूर-वीरता का परिचायक है। आपने अनशन करके जिन-शासन की सुषमा को बढ़ाया है। अनशन करके आपने जीवन की बाजी जीती है। धन्य है आपकी साहसिकता, धन्य है आपका धृति बल, धन्य है आपका मनोबल एवं आत्मबल।
अनशन जीवन का असली बोध है। आपका यह फौलादी संकल्प हम सबके लिए बड़ी प्रेरणा है। जीवन और मरण की आकांक्षा से दूर हो, मृत्यु को महोत्सव बनाने हेतु आपके साहस भरे कदम का हार्दिक अभिनंदन। आपके भावों की श्रेणी सतत प्रवर्धमान रहे। आप अपनी लक्षित मंजिल को प्राप्त करें। आपका यह शुभ संकल्प एवं अनशन की महिमा शासन प्रभावना में योगभूत बने। साध्वीश्री की सेवा में रत सहवर्ती साध्वी जगवत्सला जी एवं साध्वी अतुलप्रभाजी को इस पुनीत कार्य में सहयोगी बनने का स्वर्णिम अवसर मिला। बीदासर समाधिकेन्द्र में प्रवासित सेवाग्राही एवं सेवादायी पूरे साध्वी परिवार की ओर से हार्दिक मंगलकामना शुभ कामना।