रचनाएं
गुण गरिमा गायें हम
महिमा निराली, शासनश्री तुम्हारी, गुण गरिमा गायें हम-2
तुम हो भाग्यशाली, अनशन चमत्कारी, गुण गाथा गायें हम-2
गिरिगढ़ की पावन भूमि में, जन्म लिया था तुमने,
गुरू तुलसी कर कमलों से दीक्षा लेकर भैक्षव शासन में।
पाई तुमसे शिक्षा अद्भुत निराली।।1।।
साध्वी सोहनांजी के संग रहकर, जीवन निर्माण किया तुमने,
अच्छे-अच्छे संस्कारों से साकार किये उनके सपने।
अनगिनत उपकार तेरे, बोलो कैसे बताये ।।2।।
छोटी छोटी सतियों का, जीवन धन्य बनाया,
सहनशीलता, सरलता का पाठ तुमने पढ़ाया।
आशीष आपका, कल्याणकारी ।।3।।
आंकी जीवन की कीमत, हद् हिम्मत दिखलाई
चढ़ते भावों की श्रेणी से, लक्षित मंजिल पाई।
गुरु महाश्रमण शासन में, बनी शिव पथ की अनुरागी।।4।।
तर्ज़ : राधा बिना है