गुरुवाणी/ केन्द्र
नव वर्ष में नव आध्यात्मिक ऊर्जा से करें प्रवेश : आचार्यश्री महाश्रमण
नववर्ष की प्रातःकालीन मंगल बेला में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी ने अपनी धवल सेना के साथ ब्यावर जिले के झूंठा गांव से मंगल प्रस्थान किया और विशाल जन-समुदाय के साथ लगभग 13 किमी. का विहार कर ‘बर’ गांव में स्थित मेवाड़ा गार्डन में पधारे। मेवाड़ा गार्डन के प्रवचन पंडाल में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि आज नववर्ष का प्रारंभ हुआ है। मंगल पाठ का भी आज उपक्रम होना है। आचार्य प्रवर के इंगित के अनुसार उपस्थित जनमेदिनी अपने-अपने स्थान पर खड़ी हुई और आचार्य प्रवर ने चतुर्विध धर्मसंघ को अपने श्रीमुख से अंग्रेजी नववर्ष के संदर्भ में वृहत् मंगल पाठ सुनाया।
तदुपरान्त पूज्य प्रवर ने श्रद्धालुओं को अपनी इच्छानुसार एक संकल्प वर्ष भर के लिए लेने की प्रेरणा प्रदान की तथा आचार्यश्री तुलसी द्वारा रचित पंच परमेष्ठी गीतिकाओं को कंठस्थ करने अथवा उनके स्वाध्याय का संकल्प कराया। आचार्य प्रवर ने पावन संबोध प्रदान करते हुए फरमाया कि धर्म को उत्कृष्ट मंगल कहा गया है। अहिंसा, संयम और तप धर्म हैं। आज नववर्ष का प्रारंभ हुआ है। सन् 2025 व्यतीत हो गया है, इतिहास का विषय बन गया है और अब हम सन् 2026 में जी रहे हैं। यह काल का अपना क्रम है। काल बीतता है और व्यक्ति इस बीते हुए काल का बढ़िया उपयोग करे — यह विशेष बात है। काल स्वतंत्र है, वह अपनी गति से चलता है। अतः हम 2026 में अच्छी धर्म-साधना करें। धर्म से अच्छी पूंजी दुनिया में कोई नहीं है। गृहस्थों के पास पूंजी हो सकती है, परन्तु वह स्थायी नहीं होती। पर धर्म और कर्म का प्रभाव आगे भी साथ में जाएगा। अतः हम 2026 में समय का सदुपयोग धर्म की साधना में करें। धर्म का सदुपयोग, दुरुपयोग और अनुपयोग — सभी हो सकते हैं। हमें जितना हो सके समय का सदुपयोग ही करना चाहिए। दुरुपयोग अर्थात् बुरे कार्यों में समय को नहीं लगाना चाहिए।
आज पौष शुक्ला त्रयोदशी का दिन होने के कारण आचार्य प्रवर ने आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ के संदर्भ में आज के निर्धारित विषय ‘आचार्य भिक्षु की समझाने की शैली — सात दृष्टांत’ विषय पर समुपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आचार्यश्री भिक्षु ने ‘सात दृष्टांतों’ के माध्यम से लोगों को समझाया है। किसी को नहीं मारने का संकल्प करना विशुद्ध दया अथवा अहिंसा है। आचार्य भिक्षु की समझाने की शैली अनुपम थी। वे दृष्टांतों के माध्यम से अपनी बात को समझाने का प्रयास करते थे। आचार्यश्री के समक्ष जैन विश्व भारती द्वारा योगक्षेम वर्ष के कैलेंडर और मार्गदर्शिका पुस्तिका के संदर्भ में प्रेरित करते हुए पूज्य प्रवर ने गीत का आंशिक संगान किया। सभी लोग योगक्षेम वर्ष के कार्य को खूब अच्छे ढंग से संपन्न करें — यह प्रेरणा प्रदान की।
आचार्य प्रवर ने ‘बर’ के लोगों को आरोग्य और बोधि लाभ प्राप्त करने की प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री द्वारा रचित पुस्तक ‘18 पाप’ के अंग्रेजी अनुवाद की पुस्तक जैन विश्व भारती द्वारा पूज्य प्रवर के समक्ष लोकार्पित की गई। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी ने उपस्थित जनता को उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा कि कुछ लोग नए वर्ष को मात्र दिनांक का परिवर्तन मानते हैं, परन्तु दूसरे प्रकार के ऐसे लोग भी होते हैं जो नए वर्ष में कुछ अच्छा करने का संकल्प लेते हैं। हमें परम पूज्य आचार्य प्रवर द्वारा करवाए गए संकल्पों को स्वीकार कर उन्हें पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। हमें स्वाध्याय करके अपने आत्मबल और धृति बल को बढ़ाना चाहिए। मुख्य मुनि श्री महावीर कुमार जी ने नववर्ष के संदर्भ में प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के इस युग में हमें अपने आपको ‘आध्यात्मिक इंटेलिजेंस’ से परिपूर्ण बनाने का प्रयास करना चाहिए।
साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशाजी ने कहा कि देशभर से लोग परम पूज्य गुरुदेव से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए आए हैं। अपने जीवन में शुभ संकल्प करके आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर होने का प्रयास करें। कार्यक्रम से पूर्व बैंगलोर से समागत जैन विद्या के विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। रापंथ महिला मंडल ने गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।