गुरुवाणी/ केन्द्र
विनयशीलता के गुण का करें विकास : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ब्यावर जिले के खारवा से लगभग 16 किमी का विहार कर अजमेर जिले के जेठाना गाँव के ग्राम सरपंच पदमचंद छाजेड़ के निवास स्थान पर पधारे। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगल प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित श्रद्धालुओं को पावन संबोध प्रदान करते हुए फरमाया कि व्यक्ति के जीवन में विनयशीलता एक महान गुण होता है। कोई व्यक्ति विद्वान बन जाए और उसमें विनय हो, तो वह विद्या को सुशोभित करने वाला तत्व बन जाता है। जहाँ घमंड होता है—चाहे वह धन का हो, विद्या का, पद का, रूप का, तप का, बल का, जाति-कुल का या सत्ता का—वह घमंड अपने आप में पापकर्म का बंध कराने वाला बन सकता है। व्यवहार में भी एक विनीत व्यक्ति सुखी दिखाई देता है, जबकि अविनीत एवं उद्दंड व्यक्ति दुखी प्रतीत होता है। शास्त्रों में अनेक बार कहा गया है कि अविनीत आत्मा दुःख को प्राप्त करती है। अतः व्यक्ति को घमंड से बचने का प्रयास करना चाहिए। आत्मशुद्धि के लिए भी घमंड से दूरी आवश्यक है। जीवन में जितने अधिक सद्गुण और पवित्रता होगी, जीवन उतना ही श्रेष्ठ बनेगा। आचार्य प्रवर ने आगे कहा कि आज हमारा जेठाना आना हुआ है। पूर्व में प्रकाशित यात्रा-पथ में जेठाना गाँव सम्मिलित नहीं था, किंतु बाद में इसे जोड़ा गया और आज हमारा यहाँ आगमन भी हो गया।
पूज्य प्रवर ने जेठाना गाँव के लोगों को सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति की प्रेरणा देते हुए कहा कि इन तीनों से जीवन सुंदर बन सकता है। साधुओं का दर्शन मात्र ही पुण्य होता है। साधु चलते-फिरते तीर्थ होते हैं। यदि साधुओं के प्रति श्रद्धा से भक्ति हो, तो व्यक्ति को अवश्य लाभ प्राप्त होता है। आचार्य प्रवर ने संत-समागम, प्रवचन, कथा आदि को कल्याणकारी बताते हुए जेठानावासियों को प्रेरणाएँ प्रदान कीं और कामना की कि जेठाना के लोगों में धार्मिक भावना सदा बनी रहे। मंगल प्रेरणा के उपरांत पूज्य प्रवर ने सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति के संकल्प भी स्वीकार कराए। आचार्यश्री के स्वागत में स्थानीय सरपंच पदमचंद छाजेड़, राजकुमार छाजेड़, रेनु छाजेड़, स्थानकवासी समाज के प्रमुख धनराज नाहर तथा समता संघ के प्रमुख विशाल लूणिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति प्रस्तुत की। स्थानीय महिला मंडल एवं तेरापंथ महिला मंडल द्वारा पृथक-पृथक् गीतों का संगान किया गया। शांति बाई ने भी गीत का संगान किया। कवि भवानी शंकर तौसिक ने अपनी पुस्तक ‘काँटों से जीवन मधुवन’ का आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पण किया एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।