ऋजुता से प्रभुता की दिशा में बढ़ा जा सकता है आगे : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

खारवा। 4 जनवरी 2026

ऋजुता से प्रभुता की दिशा में बढ़ा जा सकता है आगे : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, तीर्थंकर के प्रतिनिधि, अखण्ड परिव्राजक आचार्य श्री महाश्रमण जी ब्यावर में एक दिवसीय प्रवास सुसंपन्न कर खारवा के लिए गतिमान हुए। विहार के दौरान पूज्य प्रवर का दिगम्बर परंपरा के मुनि आदित्य सागर जी से आध्यात्मिक मिलन हुआ। दोनों के बीच संक्षिप्त वार्तालाप का क्रम रहा। तत्पश्चात् आचार्य प्रवर लगभग 17 कि.मी. का प्रलम्ब विहार कर लगभग एक बजे खारवा गांव में स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में पधारे। स्कूल परिसर में आयोजित मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित जनता को आर्हत् वाङ्मय के माध्यम से अमृत देशना प्रदान करते हुए पूज्य प्रवर ने फरमाया कि हम अपने जीवन में बोलते हैं, लिखते हैं, शरीर से इशारा अथवा संकेत करते हैं और मन में चिंतन, कल्पना तथा स्मृति करते हैं। ऋजुता से हमारा व्यवहार आध्यात्मिक दृष्टि से निर्मल रह सकता है। सरलता और ऋजुता जीवन के सद्गुण हैं। व्यवहार में निश्च्छलता रहे तो वह एक पवित्रता की स्थिति होती है।
व्यक्ति ऋजुता से प्रभुता की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सरल मति वाला व्यक्ति सरलता से देखता है और कुटिल मति वाला व्यक्ति कुटिलतापूर्ण व्यवहार करता है। जिसके मन, वचन और काय में एकरूपता होती है, वह महात्मा है। हमें व्यवहार में सरलता और ऋजुता रखनी चाहिए। धोखाधड़ी और ठगी करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। सरलता से व्यक्ति का चित्त और चेतना शुद्ध रहती है। दुनिया में यदि दुर्जन व्यक्ति हैं तो सज्जन भी मिलते हैं। व्यक्ति को दुर्जनता से बचना चाहिए और सज्जनता को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। दुर्जन व्यक्ति विद्या से विवाद करता है, जबकि सज्जन व्यक्ति विद्या को बांटता है, दूसरों को ज्ञान प्रदान करता है। दुर्जन व्यक्ति धन का अहंकार करता है, जबकि सज्जन व्यक्ति धन से दूसरों का सहयोग करता है। दुर्जन व्यक्ति के पास बल हो तो वह उसका दुरुपयोग करता है, पीड़ा पहुंचाता है, जबकि सज्जन व्यक्ति अपनी शक्ति का उपयोग दूसरों की सेवा में करता है। अतः इस मानव जीवन में दुर्जनता में न जाकर धर्म के सन्मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त स्कूल के निदेशक सुयश तातेड़ ने आचार्य प्रवर के स्वागत में अपनी भावाभिव्यक्ति दी। पत्रकार जयप्रकाश श्रीश्रीमाल ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमार जी ने किया।