शक्ति होने पर भी व्यक्ति रखे क्षमा का भाव : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

चण्डावल। 30 दिसंबर 2025

शक्ति होने पर भी व्यक्ति रखे क्षमा का भाव : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी आचार्य श्री भिक्षु की अभिनिष्क्रमण स्थली बगड़ी में एक दिवसीय प्रवास संपन्न कर चण्डावल गांव में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आर्हत् वाणी के माध्यम से जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए फरमाया कि गुस्सा, आक्रोश प्रेम का नाश करता है, प्रीति को समाप्त करता है। अहंकार विनय का नाश करने वाला है, माया मित्रों का नाश करने वाली है और लोभ सब कुछ नष्ट करने वाला होता है।
व्यक्ति को गुस्सा आता है। गुस्सा मनुष्य का दुश्मन है, अतः हमेशा इसका परित्याग रखना चाहिए, अर्थात् गुस्से से स्वयं को बचाना चाहिए। आवेश आना व्यक्ति की दुर्बलता है। जब व्यक्ति को गुस्सा आता है तो वाणी भी कटु बन सकती है और चेहरे की आकृति भी अशोभनीय बन जाती है। अतः मनुष्य का एक शत्रु यह क्रोध है। साधुओं को तो शांति में रहना चाहिए, प्रसन्नता में रहना चाहिए। गुस्से में प्रवृत्त नहीं होना चाहिए। क्षमा बड़ा धर्म है, सहनशीलता बड़ी अच्छी चीज है। सहन करो — सफल बनो। श्रम करो — सफल बनो।
कहा गया है — कम खाओ, स्वस्थ रहो। गम खाओ, मस्त रहो। नम जाओ, प्रशस्त रहो। जहाँ झुकना चाहिए, वहाँ झुके। यदि कठिनाई आए तो वहाँ साहस और मनोबल रखना चाहिए। आक्रोश और गुस्सा हमारे शत्रु हैं, अतः हमें गुस्से से बचने का प्रयास करना चाहिए। शांति रखनी चाहिए। शक्ति और क्षमता होने पर भी व्यक्ति क्षमा का भाव रखे। गुस्सा और आवेश आना नीच वृत्ति होती है। अतः हमें अपने जीवन में अधिक गुस्सा नहीं रखना चाहिए, मन में शांति रखनी चाहिए। व्यक्ति को अपने भीतर क्षमा और समता के भाव का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। आचार्य प्रवर के मंगल प्रवचन के उपरान्त चण्डावल ग्राम पंचायत के सरपंच भाटिया जी ने आचार्य प्रवर के स्वागत में श्रद्धाभिव्यक्ति व्यक्त करते हुए मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।