तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

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तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

“शासन गौरव” साध्वी राजीमतीजी ने कहा आचार्य भिक्षु लब्धि प्रतिष्ठित, अतीन्द्रिय चेतना के, सत्य के उपासक थे। उन्होंने भाव दीक्षा ग्रहण की। उन्होंने कहा हे प्रभो! यह तेरापंथ अर्थात हे भगवान यह तो आपका पथ है मैं तो पथिक हूं। ढाई सौ वर्ष पूर्व का तेरापंथ आज मेरा पंथ बनता जा रहा है। आचार्य भिक्षु ने आचार और विचार की क्रांति की। वह कठोर साधक थे। विरोधों को सहा, शमशान में रहे, अंधेरी ओरी में रहे फिर भी साधुत्व के प्रति सजग रहे। भिक्षु ना होते तो हम भटक जाते। गौरव है कि इस शासन में हम साधना कर रहे हैं। सिद्धांत के पक्के थे नई लकीरें खींची। साध्वी कुसुमप्रभा, साध्वी पुलकितयशा, साध्वी प्रभातप्रभा, साध्वी मनोज्ञप्रभा ने भी आचार्य भिक्षु के साधना,संयम और मर्यादा,अनुशासन के बारे में कथानक के माध्यम से विस्तार से बताया। सभा अध्यक्ष शुभकरण चौरडिया, महिला मंडल अध्यक्ष प्रीति मरोठी , तेयुप अध्यक्ष निर्मल चोपड़ा ने उपासक प्रशिक्षक डालिमचन्द नौलखा का स्वागत व अभिनंदन किया। सभा मंत्री मनोज घीया, युवक परिषद, किशोर मंडल, कन्या मंडल सभी का विशेष श्रम रहा। आभार ज्ञापन सुशील भूरा ने किया।