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तेरापंथ-मेरापंथ सेमिनार का आयोजन
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासनश्री साध्वी बसंतप्रभाजी, साध्वी रचनाश्रीजी, समाधि केन्द्र व्यवस्थसापिका साध्वी मंजुयशाजी के सान्निध्य में दो दिवसीय सेमिनार तेरापंथ -मेरा पंथ आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य प्रशिक्षक वरिष्ठ उपासक, प्राद्यापक निर्मल जी लौलखा थे। उसके पश्चात साध्वीवृन्द ने तेरापंथ के सिद्धान्तों केा समझाने वाला गीत भिक्षु को समझो और समझाओ गीत से मंगलाचरण किया। साध्वी बसन्तप्रभाजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा- तेरापंथ अपने आप में एक अनूठा धर्मसंघ है।
साध्वी रचनाश्री जी ने कहा की प्रत्येक तेरापंथी श्रावक को तेरापंथ मेरा पंथ कहते हुए गौरव होना चाहिए। क्योकि तेरापंथ की एक मात्र ऐसा सम्प्रदाय है जो एक गुरू की आज्ञा में चलता है। वैदिक परम्परा में माना जाता है। भगवान के हिलाए पता हिलता है या नही, पर तेरापंथ में आचार्य के हिलाया पता हिलता है तेरापंथ में एक आचार्य, एक आचार, एक विच का प्रावधान है। ऐसे धर्म संघ के मेरा पंथ कहते गौरव की अनुभूति होती है। समाधि केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी मंजुयशा जी ने फरमाया आचार्य भिक्षु ने संघ चलाने के उदेश्य से अभिनिष्क्रमण नहीं किया। सत्य के मार्ग पर चलने के लिए एक प्रशस्त मार्ग का पथदर्शन किया। आचार्य भिक्षु द्वारा दिया हुआ यह बीज आज वटवृक्ष बनकर लहलहा रहा है। सभा के अध्यक्ष सम्पतमल बैद, युवक परिषद की ओर से ऋतिक बोथसरा, महिला मण्डल की ओर से भावना दुगड़ ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का संचालन भावन दुगड़ ने किया।