तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का सफल आयोजन

संस्थाएं

साउथ हावड़ा।

तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का सफल आयोजन

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सु‌शिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा 3 के सानिध्य में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन में तेरापंथ मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा साउथ हावड़ा द्वारा हावड़ा मिल्स के क्लब हाउस में आयोजित किया गया। कार्यशाला में लगभग 300 व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के मुख्य वक्ता उपासक सुरेश बाफना थे।उदघाटन सत्र में उपासक श्रेणी व कार्यशाला के राष्ट्रीय संयोजक सूर्य प्रकाश श्यामसुखा विशेष रूप से उपस्थित थे। विभिन्न सत्रों में चली कार्यशाला में प्रशिक्षण प्रदान कराते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा जैन धर्म का नवीनतम संस्करण तेरापंथ है। तेरापंथ के संस्थापक आचार्य भिक्षु थे।
आचार्य भिक्षु विशिष्ट, विलक्षण, अद्‌भुत मेघा के धनी थे। उन्होंने आचार विचार क्रांति के साथ साथ अनु‌शासन में भी क्रांति की। उनका स्पष्ट चिन्तन था संघ को दीर्घ जीवी रखने के लिए आचार विचार का निर्मल व स्वस्थ होना जरूरी है। उनके जीवन काल में अनेक संघर्ष आए किन्तु वे घबराएं नहीं। मुनि ने आगे कहा तेरापंथ का अर्थ है हे प्रभो यह तेरा पंथ प्रभु का पंथ ही मेरा पंथ है। व्यक्ति मैं का प्रयोग न करके हम और आप शब्द का प्रयोग करें। जिससे संबंधों को मजबूती मिलेगी। प्रेम और सौहार्द का विकास होगा। जिस दान में संयम का पोषण होता है वह लोकोत्तर दान है। जिस दान में असंयम का पोषण होता है वह‌ लौकिक दान है। दया आत्मा का नवनीत है आत्मा का मूल है। जो द‌या का भाव रखता है, लोग उसे याद रखते है। प्राणी मात्र के प्रति संयम रखना ही अहिंसा है।कार्यशाला में सुरेश ने अच्छी तरह समझाया व सभी ने अपना दायित्व निर्वहन किया। मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। कार्यशाला का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल के स्वागत गीत से हुआ। स्वागत भाषण साउथ हावड़ा सभा के अध्यक्ष लक्ष्मीपत बाफना ने दिया। सभा के सदस्यों ने सुम‌धुर गीत की प्रस्तुति दी।