दो दिवसीय प्रेक्षा ध्यान कार्यशाला का शुभारंभ

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गांधीनगर बैंगलोर।

दो दिवसीय प्रेक्षा ध्यान कार्यशाला का शुभारंभ

तेरापंथ सभा गांधीनगर के तत्वावधान में तुलसी चेतना सेवा केंद्र कुंभलगढ़ में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के विद्वान सुशिष्य डॉ मुनि पुलकित कुमारजी ठाणा 2 के मंगल सानिध्य में दो दिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला (शिविर) का शुभारंभ हुआ। डॉ. मुनि पुलकित कुमारजी ने उद्घाटन सत्र में कहा प्रेक्षा ध्यान आत्म साक्षात्कार की प्रक्रिया है। बाहरी प्रवृत्ति में सुख और दुख की अनुभूति होती है किंतु ध्यान निवृत्ति करना सीखाता है। प्रेक्षा ध्यान सुख दुख से ऊपर उठकर आनंद में स्थिति में पहुंचाता है। प्रवृत्ति से निवृत्ति की तरफ आगे बढ़ाने में ध्यान की मुख्य भूमिका रहती है। ध्यान करने से कषाय मंद होता है। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार जी ने प्रेक्षाध्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर के शुभारंभ के अवसर पर सभा अध्यक्ष पारसमल भंसाली ने स्वागत वक्तव्य दिया।संस्था शिरोमणी तेरापंथी महासभा के उपाध्यक्ष एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ईरोड समागत नरेंद्र नखत ने विचार रखें। शिविर संयोजिका रेणु कोठारी ने प्रेक्षा ध्यान के छोटे छोटे प्रयोग करवाए। सभा मंत्री विनोद छाजेड़ ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए इस दो दिवसीय आवासीय प्रेक्षाध्यान शिविर में सहभागी बनने की प्रेरणा दी एवं इस प्रेक्षा ध्यान शिविर में लगभग 100 शिविरार्थी लाभ लेंगे जानकारी दी।