नव वर्ष पर वृहद मंगल पाठ एवं  विविध आयोजन

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शालीमार बाग

नव वर्ष पर वृहद मंगल पाठ एवं विविध आयोजन

नववर्ष उपलक्ष में जन समूह को संबोधित करते हुए शासनश्री सुव्रताश्री ने कहा कि आप नये में प्रवेश कर गए। नये उल्लास नई उमंग और उत्साह के साथ कर रहे हैं। भौतिक विकास के लिए आपने नये नये सपने संजोये होंगे। नई-नई योजनाएं बनाई होंगी। पर इसके साथ आध्यात्मिक विकास को न भूलें। इस क्षेत्र में भी गति-प्रगति को राहें तय करें। उन पर अग्रसर होकर अपने जीवन को आध्यात्म संपदा से संपन्न बनाये। समय गतिशील है। वह नदी के प्रवाह की तरह रुकता नहीं। उससे लाभ उठाने वाले आकाशीय उंचाईयों को प्राप्त कर सकते है।
समय किसी के साथ पक्षपात नहीं करता। सबको 24 घंटे का दिन-रात मिलता है। किसी को ज्यादा या कम नही एक संस्कृत कवि ने लिखा है-
काव्य शास्त्र विनोदेन, कालो गच्छति धीमताम्।
व्यसने नैव मूर्खांणां, निद्रया कल हेन वा।।
बुद्धिमान व्यक्तियों का काव्य शास्त्र आदि के पठन पाठन में आत्माचिन्तन में जीवन निर्माण के कार्योँ में समय व्यतीत होता है। मूर्ख व्यक्तियों का नींद में लड़ाई झगड़े में एवं व्यर्थ की बातों में व्यतीत होता है। तेरापंथी महासभा के उपाध्यक्ष संजय खटेड़ अरूण संचेती, शालीमार बाग तेरापंथ सभा अध्यक्ष सज्जन गिड़िया आदि ने विचार व्यक्त किए।