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नव वर्ष पर वृहद मंगल पाठ एवं विविध आयोजन
साध्वी उदितयशा जी के द्वारा मंगल मंत्रोच्चार के द्वारा मंगलमय वर्ष का शुभारंभ हुआ। साध्वी श्रीजी ने मंगल की व्याख्या करते हुए कहा की उसके लिए भगवान महावीर की वाणी को जानने का प्रयास करना है। क्षण की चर्चा करते हुए आपने कहा-भगवान ने चार दुर्लभ क्षणों को बताया है। सम्यक्त्व, श्रुत, प्रत्याख्यान, चारित्र इन क्षणों को प्राप्त करके ही प्राणी वास्तविक BEAUTY को प्राप्त कर सकता है। HEALTHY बन सकता है और SPIRITUALITY को प्राप्त करके OTP की जगह ETP अर्थात EVERY TIME PASSWORD को प्राप्त कर सकता है।सिद्धे शरणं पवज्जामी का पथ प्राप्त कर सकता है।
नए वर्ष का मात्र आयोजन ना हो यह हमारे प्रयोजन को सिद्ध करने वाला बने। हमे अपने वजूद का भान होते रहे। हम कुछ भी खाएं, पहने , बोले या कही भी जाएं हमेशा जागरूकता बनी रहे कि मैं श्रावक हूँ उसके अनुसार ही अपना जीवन ढालने का प्रयास करें। साध्वी श्री जी ने नए वर्ष पर एक संकल्प भी कराया जब भी साधु संतों के सामने जाएं खुले मुंह ना बोले बोलने पर एक बार नमस्कार महामंत्र का जाप करें, साध्वीवृन्द के द्वारा सुमधुर गीतिका का भी संगान किया गया।