आचार्य भिक्षु ने आत्मा के धर्म का मार्ग दिखाया

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गंगाशहर।

आचार्य भिक्षु ने आत्मा के धर्म का मार्ग दिखाया

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद गंगाशहर द्वारा भिक्षु दर्शन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनि कमल कुमार जी के पावन सानिध्य में किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में परिषद अध्यक्ष ललित राखेचा ने प्राग्-वक्तव्य में सबका स्वागत किया। इसके पश्चात मुख्य वक्ता युवक रत्न राजेंद्र सेठिया ने आचार्य भिक्षु के दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सावद्य और निर्वद्य के भेद को समझे बिना सामाजिक कर्तव्य और धर्म का सही बोध संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि दस प्रकार के दान में धार्मिक दान ही श्रेष्ठ दान है, जबकि अधर्म दान निंदनीय होता है। मुनि कमल कुमार जी ने अपने प्रवचन में कहा कि आचार्य भिक्षु ने लौकिक प्रवृत्तियों को नितांत सांसारिक बताया है। गृहस्थ जीवन में इन प्रवृत्तियों को अपनाना व्यावहारिक आवश्यकता है, परंतु उन्हें धर्म नहीं माना जा सकता। धर्म कभी बलपूर्वक नहीं कराया जा सकता और न ही उसका धन से कोई संबंध है। धर्म का वास्तविक संबंध अहिंसा, संयम और तप से है। मुनिश्री ने आगे बताया कि आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी के अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा प्रदत्त कार्यक्रमों में आचार्य भिक्षु के साहित्य का गहन अध्ययन भी एक महत्वपूर्ण आयाम है, जिससे उनके व्यक्तित्व और कर्तृत्व को समझकर व्यक्ति श्रद्धावान बन सके। महासभा से पधारे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय चौपड़ा, कोषाध्यक्ष मदन मरोठी एवं सुरेश बैद का पताका एवं साहित्य भेंट कर सम्मान किया गया।