शक्ति जागरण का उपक्रम हैं प्रेक्षाध्यान

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वेल्लोर।

शक्ति जागरण का उपक्रम हैं प्रेक्षाध्यान

आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी सोमयशा जी सान्निध्य में १२ व्रत कार्यशाला का आयोजन हुआ। साध्वी सोमयशा जी ने कहा जीवन को नए दृष्टिकोण से समझाने के लिए जानने के लिया। देखने के लिए जीवन को संवारने के लिए 12 व्रत आत्म उत्थान करता है। जैसे 12 प्रकार के बायोकेमिकल जो 200 रोगों को नष्ट करती है, वैसे ही 12 व्रत करोड़ो-करोड़ो भव को कर्म रूपी रोग को दूर करता है। गाड़ी में ब्रेक की तरह, जीवन में व्रत का महत्त्व है। अनेक उदाहरणों के द्वारा 12 व्रत को विस्तार से समझाया, अनेक भाई-बहनों ने स्वीकार किया।
“दो दिन प्रेक्षाध्यान कार्यशाला“- विषय- कैसे जिएं टेंशन फ्री साध्वीश्री ने इस विषय का प्रतिपाति करते हुए प्रेक्षाध्यान के छोटे प्रयोगों से हम अपनी लाइफ में टेंशन फ्री रह सकते उनके अनेक छोटे छोटे टिप्स बताए। 1.गुरूपदेश, 2.श्रद्धा, 3.सतत् अभ्यास, 4.मन की एकाग्रता। साध्वी सरलयशा ने कहा प्रेक्षा का अर्थ वर्तमान का आनंद लेना, ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है, जैसे पानी में मिट्ठी आई हुई। उसे दूर कर पानी को निर्मल बना देता है। वैसे ही ध्यान के द्वारा आत्मा को निर्मल बनाया जा सकता है। इस कार्यशाला में वेल्लोर वासियो ने अच्छी संख्या में लाभ लिया। साध्वी ऋषिप्रभा ने मुद्रा विज्ञान के बारे में बताया, अनेक मुद्राएँ करवायी।