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तेरापंथ-मेरा पंथ कार्यशाला का आयोजन
शासनश्री साध्वी विद्यावतीजी द्वितीय आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में तेरापंथ भवन मालाड़ में तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन बहुत ही व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से हुआ। साध्वीश्रीजी के महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। मालाड तेरापंथ सभा के अध्यक्ष गणेशलाल कोठारी ने स्वागत व्यक्तत्व दिया। साध्वी डा.रिद्धि यशाजी ने तेरापंथ के उद्भव एवं तत्कालीन परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए आचार्य भिक्षु के पास ऐसी मानसिकता और दीर्घदर्शिता थी, जिसके आधार पर परिस्थितियों का सही मूल्यांकन कर अभिनिष्क्रमण किया। उनका अभिनिष्क्रमण किसी ब्याक्ति विशेष के विरोध में नहीं हुआ, अपितु आचार और विचार की शुद्धता के लिए हुआ।
साध्वी प्रेरणाश्रीजी एवं साध्वी मृदुयशाजी ने गीत का संगान किया। शासनश्री साध्वीश्री जी ने विलक्षण पुरुष आचार्य भिक्षु के जीवन के विविध पहलुओं पर सारगर्भित उद्बोधन देते हुए कहा आचार्य भिक्षु संकल्प के धनी थे। महामना भिक्षु ने साधना को संगठन के साथ जोड़कर उसे ऐसे मजबूत सांचे में ढाला कि हजारों वर्षों तक उसे कोई हिला नहीं सकता। कार्यशाला के मुख्य वक्ता सूरत के उपासक प्रवक्ता सुरेश बाफना ने विचार व्यक्त किए। मुम्बई सभा के मंत्री दिनेश सुत्तरिया, महासभा के प्रतिनिधि राजेन्द्र जी मुणोत,अर्हंम् फाउंडेशन के मंत्री दलपत बाबेल, महिला मंडल के अध्यक्ष उर्मिला भंडारी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का कुशल संचालन तेरापंथ सभा के मंत्री सुरेश धोका ने किया।