त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का हुआ आयोजन

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साउथ कोलकाता।

त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का हुआ आयोजन

आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमारजी ठाणा 3 के सान्निध्य में प्रेक्षा फाउंडेशन के तत्वावधानमें व तेरापंथ सभा के आयोजकत्व में त्रिदिवसीय प्रेक्षा ध्यान कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ भवन में हुआ। जिसमें 50 संभागी थे। इस अवसर पर मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा- दुनिया में नाना प्रकार की ध्यान प्रकृतियां प्रचलित है उसमें एक ध्यान पद्धति प्रेक्षाध्यान है। प्रेक्षा ध्यान का अर्थ है- गहराई से देखना, अपने आपका निरीक्षण करना। व्यक्ति स्व दोष की जगह पर दोष का दर्शन करता है। परदोष दर्शन समस्या है स्वदोष दर्शन समाधान है। ध्यान स्वदोष दर्शन की प्रक्रिया है। जिस प्रकार शरीर में मस्तिष्क का, आख में पुतली का, वृक्ष में जड़ का, मकान में नीव का महत्व है। उसी प्रकार आत्म साधना में ध्यान का मूल्य है। ध्यान प्रवृत्ति से निवृत्ति. की यात्रा है।