रचनाएं
आध्यात्म की लहर
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिया कनकरेखा जी आदि ठाणा ४ के त्रिवर्षीय पंजाब यात्रा में संघ प्रभावना करते हरियाणा होते हुए राजस्थान सीमा में प्रवेश किया। संगरिया मंडी में दस दिवसीय प्रवास में संघ प्रभावना को बढ़ाने के अनेक कार्यक्रम हुए। प्रेक्षाध्यान वर्कशॉप - दो दिवसीय प्रेक्षाध्यान वर्कशॉप में अनेक भाई-बहन खुले सत्र के साथ संभागी बनें। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी गुणप्रेक्षाजी साध्वी संवरविभाजी व साध्वी हेमंतप्रभा जी के सुमधुर मंगलाचरण से हुआ। साध्वी कनकरेखाजी ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा वर्तमान की ज्वलंत रहस्य है टेंशन। टेंशन फ्री लाईफ के लिए प्रेक्षाध्यान के विभिन्न प्रयोगों को समझें और जीवन में अपनाएं। जीवन का सच्चा आनंद प्राप्त करें। आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने अशांत विश्व को शांति का संदेश देने प्रेक्षाध्यान का अभिनव आयाम दिया। साध्वी हेमंतप्रभा जी ने श्वास प्रेक्षा व कार्योत्सर्ग का प्रयोग करवाया। कुशल संचालन साध्वी संवरविभा जी ने किया। बिजनेस ओनेस्टी सेमिनार- व्यापार मंडल संगरिया के तत्वावधान में जैन-जैनेश्वर सभा की विशाल उपस्थिति में व्यापार मंडल कमेटी हॉल में सेमिनार का आयोजन किया गया।
साध्वी कनकरेखा जी ने मंगल उद्बोधन में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा-विकास का मूल आधार है- नैतिकता। घर-परिवार समाज व राष्ट में मानवीय मूल्यों की सुरक्षा के लिए नैतिकता, प्रामाणिकता व सदाचार का हेना जरूरी है। पर आज का मानव पैसे के पीछे अपना ईमान खो रहा है। पर अच्छे व्यक्तित्व के लिए बेईमानी से अर्थ का अर्जन न करे। हमारे जीवन की सबसे बड़ी संपदा है- नैतकता। व्यापार मंडल का श्रृंगार बने सदाचार। साध्वी हेमंत प्रभा जी ने मंगल गीत का संगान किया। सभी को साध्वीश्री ने नशामुक्ति का संकल्प करवाया। कैसे रहें परिवार खुशहाल कार्यशाला- साध्वीश्री जी ने अपने वक्तव्य में अध्यात्म् परिषद को संबोधित करते हुए कहा- समाज की एक ईकाई है परिवार। पारस्परिक सम्बन्धों में जहां विनय-वात्सल्य का रिश्ता होता है, रिश्तों में मिठास होता है तो हर हाल में परिवार का हर सदस्य मस्त रहता है। अलमस्त रहता है। घर का हर व्यक्ति अपने दायित्व को समझें और उसका सम्यग आचारण करे। जिससे परिवार में ही स्वर्ग का नजारा देखा जा सकता है। बशर्तें हम दूसरों की कमियों को लेट गो करना सीखें। अच्छाईयों को एकसेप्ट करें ताकि परिवार में खुशहाली का नजारा देखा सकें। सहना हमारे जीवन का श्रृगार बन जाएं। साध्वी हेमंतप्रभा जी ने सुमधुर गीत के साथ परिवार खुशहाली पर स्वर प्रस्तुत किया। साध्वी गुणप्रेक्षाजी ने अपने विचार रखें।