रचनाएं
नव वर्ष के उपलक्ष में पूज्यप्रवर द्वारा कंठस्थ करने हेतु प्रेरित पंच परमेष्ठी से सम्बद्ध गीत
लय : लें नये निर्माण का व्रत
धरमाचारज! मुझ तारो,
मैं लीन्हो शरण तुम्हारो।
है और न कोई चारो ।।
भवसागर है अथग अमित जल, नहिं है निकट किनारो।
जबर-ज्वार रै झोला माही, बीत्यों जाय जमारो।।
साश्रव आतम-नाव पुराणी, पल-पल जल पेसारो।
डगमग-डगमग डोलै था बिन, कुण है खेवणहारो?
डगर-डगर में मगर भयंकर, पग-पग पर भय बारी।
औ तूफान उठे हड़बड़कै, धड़कै दिल दुनियां रो।।
आय लगी अब बीच भंवर में, मन-मांझी मतवारो।
इण बिरिया में इण दरिया में, साहिब! शरणो थांरी।।
प्रतिनिधि आप प्रथम-पद का हो, आर न पार गुणां रो।
करुण पुकार सुणो सानुग्रह 'तुलसी' पार उतारो।।