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गुरुदेव तुलसी के अवदान जन जन के कल्याण के लिए थे
आचार्य श्री तुलसी की मासिक पुण्यतिथि के अवसर पर आशीर्वाद भवन में उद्बोधन देते हुए उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनि कमलकुमार जी स्वामी ने कहा कि गुरुदेव श्री तुलसी संत परंपरा के उज्जवल नक्षत्र थे, जीवन पर्यंत उन्होंने स्वयं के आत्मकल्याण के साथ जन जन के कल्याण के लिए अथक श्रम किया, वे मानव मात्र में नैतिकता और मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए लगे रहे इसलिए उनके अवदान भले अणुव्रत हो, जीवन विज्ञानं हो, प्रेक्षा ध्यान हो चाहे नया मोड़ हो ये सभी उस समय की परिस्थिति और कुरुढ़ियों को दूर करने के लिए आम आदमी के हित के लिए थे। आचार्य तुलसी का आचार्य काल तेरापंथ धर्मसंघ में आज तक सबसे लम्बे समय का रहा है और उनके अवदानों की श्रखला भी बहुत लम्बी रही है। मुनि श्री ने कहा कि भगवान् महावीर ने बताया कि जिसका जन्म होता है वह मृत्यु को भी प्राप्त होता है। भगवान् महावीर ने कहा कि संयमी जीवन सर्वश्रेष्ठ होता है। असंयमी का क्षण भर भी जीना कष्टकारी होता है। मुनि श्री ने कहा कि 'समया धम्म मुदाहरे मुणी' अर्थात समता में ही धर्म है। लाभ अलाभ, सुख- दुख में सम भाव रखना चाहिए। जब व्यक्ति का अंतिम समय दृष्टिगोचर होना लगने लग जाये उस समय परिवार के सदस्यों को जागरूक व मनोबल से त्याग, तपस्या, ध्यान स्वाध्याय व संथारे संलेखना की ओर आगे बढ़ना चाहिए।