संस्थाएं
कुबुद्धि ही सब दुख मुसीबतों का कारण
बुरी बुद्धि ही सभी कष्टों और समस्याओं का मूल कारण है, क्योंकि गलत सोच, लालच, अज्ञानता और गलत निर्णय ही हमें दु:ख की ओर ले जाते हैं, जो कि बुद्ध और अन्य दार्शनिक विचारों से मेल खाता है, जहाँ अज्ञानता को ही दु:ख का कारण माना जाता है। समस्त दुखों की जननी कुबुद्धि है इसके मायाजाल से बचकर रखना चाहिए कब और किस समय यह व्यक्ति के मन को भ्रमित कर दे और उसके बाद दुखो का पहाड टूटने से कोई नही रोक सकता। ये शब्द मनीषी संत मुनि विनयकुमार जी आलोक ने सैक्टर-24 सी अणुव्रत भवन तुलसीसभागार में सभा को संबोधित करते हुए कहे। इसके विपरित समस्त सुखों और शांति की जननी सद्बुद्धि है।
कुबुद्धि हमें आनंद से वंचित करके नाना प्रकार के क्लेश, भय और शोक-संतापों में फंसा देती है। जब तक यह कुबुद्धि रहती है तब तक कितनी ही सुख सामग्री प्राप्त होने पर चैन नहीं मिलता। एक चिंता दूर नहीं हो पाती कि दूसरी सामने आ खड़ी होती है। इस विषम स्थिति से छुटकारा पाने के लिए सद्बुद्धि जरूरी है। इसके बिना शांति मिलना किसी भी प्रकार संकाव नहीं। संसार में जितने भी दुख हैं, कुबुद्धि के कारण हैं। लड़ाई-झगड़ा, आलस्य, दरिद्रता, व्यसन, कुसंग आदि के पीछे मनुष्य की दुर्बुद्धि ही काम करती है।