मर्यादा मधुमास है

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साध्वी अणिमाश्री, डॉ साध्वी सुधाप्रभा

मर्यादा मधुमास है

मर्यादा के महाकुंभ का, कैसा भव्य नजारा है।
मेरं शरणं गच्छामि का, गूंज रहा शुभ नारा है।।
आर्य भिक्षु का हस्तलिखित यह पत्र गण का प्राण है।
मर्यादा है शान संघ की, मर्यादा ही त्राण है।
मर्यादित अनुशासित गण यह, प्राणें से भी प्यारा है।।
जायाचार्य ने मर्यादा का, कितना मान बढ़ाया है।
मर्यादोत्सव देकर गण का, गौरव शिखर चढ़ाया है।
मर्यादा से सुसज्जित यह, तेरापंथ हमारा है।।
धरती अम्बर, चॉंद सितारे, मर्यादा में रहते हैं।
मर्यादा में रहो हमेशा, सागर सारे कहते हैं।
मर्यादा आधार सभी का, रक्षा कवच सुप्यारा है।।
मर्यादा आश्वास संघ का, मर्यादा विश्वास है।
मर्यादा है श्वास संघ का, मर्यादा मधुमास है।
आर्य भिक्षु का शासन पाकर, चमका भाग्य सितारा है।।
मर्यादा के महानायक प्रभु महाश्रमण रखवारे हैं।
प्रगति पंथ पर सदा बढ़ाते, जीवन के उजियारे हैं।
मर्यादा के अमृत रस से, तृप्त बना गण सारा है।
लय : ब्याऊं बिनणी