गुरुवाणी/ केन्द्र
वर्धमान होती रहे साधना और संघ संपदा : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में ‘‘वर्धमान महोत्सव’’ का भव्य रूप में शुभारंभ डीडवाना-कुचामन जिले के बोरवाड़ नगर में हुआ। इससे पूर्व परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ मकराना से गतिमान हुए भव्य स्वागत जुलूस के साथ लगभग 8 किमी का विहार सुसंपन्न कर बोरावड़ में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पधारे।
वर्धमान महोत्सव का प्रारंभ इसी विद्यालय में बने प्रवचन पांडाल में आचार्यश्री महाश्रमण जी ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मंडल बोरावड़ ने गीत का संगान किया। क्षेत्रीय विधायक श्री जाकिर हुसैन गैसावत ने आचार्य प्रवर के स्वागत में अपनी अभिव्यक्ति दी। बोराबड़ के पूर्व प्रधान श्री हिम्मत सिंह राजपुरोहित ने बोरावड़ की ओर से अभिनंदन पत्र का वाचन किया। विधायक व बोरावड़ वासियों ने आचार्य श्री महाश्रमण जी को अभिनंदन पत्र समर्पित किया। आचार्य श्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। साध्वी वर्या संबुद्धयशा ने अपने उद्बोधन में कहा कि संघ हमारे लिए शरणदाता है यहां आकर व्यक्ति अपना विकास कर सकता है, इसमें निश्चिंता का अनुभव करता है। जो अपना जीवन संघ को समर्पित कर देता है उसकी प्रत्येक अपेक्षाओं को संघ पूरा करता है। जब हम संघ की मर्यादाओं को अनुरूप चलते हैं तो संघ भी हमारी रक्षा करता है।
आचार्य भिक्षु ने संघ की सुन्यवस्था के लिए मर्यादाओं का निर्माण किया और प्रज्ञापुरूष जयाचार्य ने संघ व्यवस्थाओं को और सुनियोजित किया। तेरापंथ धर्मसंघ मर्यादा और अनुशासन का जागृत प्रतिरूप है। वर्तमान में परमपूज्य आचार्यवर साधु-साध्वियों के विकास हेतु निरन्तर नये-नये आयाम प्रदान कर रहे हैं। साधना के अनेक उपकक्रम धर्मसंघ के ऊर्ध्वारोहण हेतु अनेक अवदान पूज्य प्रवर ने दिए हैं। इस संघ के माध्यम से हम अपनी चेतना का ऊर्ध्वारोहण कर सकते हैं। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि शास्त्र के एक श्लोक में कहा गया है कि -‘वर्धमान बनो!’ ज्ञान, दर्शन, चरित्र, क्षांति और मुक्ति में वर्धमान बनो। इस वर्ष हम वर्धमान महोत्सव के लिए बोरावड़ में आए हैं। यह महोत्सव मानों मर्यादा महोत्सव की पृष्ठि भूमि का आयोजन है। इसका नाम बहुत गरिमापूर्ण है क्योंकि नाम में परमाराध्य भगवान महावीर का नाम ‘वर्धमान’ समाविष्ट है।
‘वर्धमान महोत्सव’ का नाम लेने से प्रभु महावीर का नाम-वर्धमान हमारे मुख पर आ जाता है। अच्छी दिशा में वर्धमानता ऊँची आर अच्छी बात होती है। हमारा साधु-साध्वी, समणी, और मुमुक्षु समुदाय संख्या की दृष्टि से बढ़ता रहे। श्रावक-श्राविकाओं की दृष्टि से भी वर्धमान हो। एक संदर्भ बढ़ते रहों का यह भी हो सकता है कि इस चतुर्मास की संपन्नता के पश्चात् गुरुकुल वास में साधु-साध्वियों व समणियों के आगमन से संख्या में वर्धमानता हो जाती है। इसलिए भी वर्धमान महोत्सव की वर्धमानता का प्रसंग बन जाता है। धर्म संघ में साधु-साध्वियों व समणियों की संख्या बढ़े यह मुख्य बात होती है, इसके लिए मुमुक्षुओं की संख्या बढ़नी चाहिए।
संख्या बढ़ाने के साथ यह महत्वपूर्ण है कि गुणात्मकता भी बढ़े। छोटी खाटू के मर्यादा महोत्सव के पूर्व आज बोरावड़ में त्रिदिवसीय मर्यादा महोत्सव के पूर्व आज गुणात्मकता में ज्ञान का भी अपना महत्वपूर्ण स्थान है। व्यक्ति में स्मयक् ज्ञान विकास हो और बहुश्रुतता बढ़े। व्यक्ति में प्रतिमा, प्रज्ञा हो और फिर स्वाध्याय किया जाए तो ज्ञान का विकास हो सकता है। ज्ञान के साथ ही श्रद्धा अर्थात् सम्यक् दर्शन अच्छा रहे। जो वीतराग द्वारा प्ररूपित है वह सत्य ही है, यह आस्था रहनी चाहिए। कषाय - क्रोध, मान, माया, लोभ प्रतनु रहें, मंद रहे। अनाग्रह और विनम्र भाव से तत्व बोध करने का प्रयास हो। इन सबसे सम्यक् दर्शन का पुष्टि करण हो सकता है। बोरावड़ की जनता में और हमारे श्रावक-श्राविकाओं में भी खूब अच्छा विकास होता रहे। यहां के लोगों में भी अच्छी चेतना बनी रहे। आचार्य प्रवर के मंगल प्रवचन के उपरांत तेरापंथ कन्या मंडल ने अपनी प्रस्तुति दी। तेरापंथ महिला मंडल बोरावड़ की अध्यक्ष भारती कोटेचा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी।