आत्मानुशासन है दु:ख मुक्ति का मार्ग : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

मकराना। 14 जनवरी 2026

आत्मानुशासन है दु:ख मुक्ति का मार्ग : आचार्यश्री महाश्रमण

जन-जन के मानस को आध्यात्मिक सिंचन प्रदान करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी धवल सेना के साथ संगमरमर नगरी मकराना में पधारे। जैन और अजैन सभी मकराना वासियों ने मानवता के मसीहा का स्वागत किया। मकराना के सामुदायिक भवन में आयोजित मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित श्रद्धालुओं को अमृतदेशना प्रदान करते हुए शांति दूत आचार्यश्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि व्यक्ति के मन में दुःख मुक्ति की भावना रह सकती है। व्यक्ति के जीवन मे बीमारी, बुढ़ापा, मृत्यु, जन्म आदि भी दुःख होते हैं। सारे दुःखों को शारीरिक और मानसिक दुःख इन दो प्रकारों में समाहित कर सकते हैं। शारीरिक दुःख बीमारी आदि के रूप में आ सकते हैं। तभी व्यक्ति को आर्थिक स्थिति या अन्य किसी बात या विषय को लेकर मन में भी कष्ट या दुःख हो सकता है, वह मानसिक कष्ट होता है।
प्रश्न है कि दुःखों से छुटकारा कैसे मिले? शास्त्रा में आध्यात्मिक उपाय बताया गया है कि अपने आपका अभिनिग्रह करो, अपने आपका संयम करो तो दुःखों से छुटकारा मिल सकेगा। यदि जीवन में आत्मानुशासन हो तो काफी हद तक दुखों से छटकारा मिल सकेगा। परम पूज्य आचार्य श्री तुलसी ने भी अणुव्रत के माध्यम से अपने लिए हमें अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। कई बार वाणी के असंयम से परेशानी हो सकती है। वाणी के द्वारा किसी पर मिथ्यादोषारोपण, कटु बोलने, आदि से बचना चाहिए। वाणी में मिठास होनी चाहिए। साधु के तो तीन करण तीन योग से झूठ बोलने का त्याग होता है।
गृहस्थ जीवन में मे जितना संभव हो सके झूठ बोलने से बचने का प्रयास करना चाहिए। इसी प्रकार शरीर का भी संयम रखना चाहिए। साथ ही आंख, कान, आदि इन्द्रियों का उचित मात्रा में संयम रखना चाहिए। सबसे बड़ी बात है कि मन का संयम रखें। मन मे किसी के प्रति बुरा न चाहे। शरीर, वाणी, इन्द्रियां और मन का संयम हो जाए तो जीवन में आत्मानुशासन आ सकता है। आचार्य प्रवर ने कहा कि आज मकराना में आना हो गया है। यहां के सभी लोगों में धार्मिक भावना, सद्भावना, नैतिकता, व नशा मुक्ति की भावना रहे। आचार्य प्रवर ने लोगों को प्रेक्षा ध्यान का प्रयोग भी करवाया।
साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभाजी ने जनता को उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा कि परम पूज्य आचार्य वर लोगों को अच्छा जीवन जीने के अनेक सूत्र प्रदान करते हैं। जीवन में अहिंसा, ईमानदारी, सत्य रखने के अनेक छोटे-छोटे सूत्र प्रवचन के माध्यम से जनता तक पहुँचा रहे हैं। इन सूत्रों को जीवन में ग्रहण करके एक व्यक्ति अच्छा इंसान बन सकता है। आचार्य प्रवर के स्वागत में मकराना तेरापंथी सभा के अध्यक्ष सुरेन्द्र कोठारी व नरेश भंडारी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। स्थानीय विधायक जाकिर हुसैन गेरावत ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्वेताम्बर जैन संघ की महिलाओं ने गीत की प्रस्तुति दी। तेरापंथ कन्या मंडल ने भी अपनी प्रस्तुति दी।