गुरुवाणी/ केन्द्र
संवर ही मोक्ष का कारण है : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, तीर्थंकर के प्रतिनिधि, अखण्ड परिव्राजक, महातपस्वी युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी आज प्रातः परबतसर से अपनी धवल सेना के साथ गतिमान हुए और लगभग 12 किमी का विहार सुसंपन्न कर खोखर में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। विहार के दौरान मार्ग में एक स्थान पर सैनिक स्कूल के विद्यार्थियों को पूज्य प्रवर ने प्रेरणा पाथेय प्रदान किया तथा नशामुक्ति का संकल्प भी स्वीकार करवाया। मार्ग में ही अजमेर रेंज के आई.जी. राजेन्द्र सिंह ने भी आचार्य प्रवर के दर्शन किए और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
विद्यालय परिसर में आयोजित मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित जनता को अमृत देशना प्रदान करते हुए युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि जैन आगमों में नौ पदार्थों का उल्लेख मिलता है इन्हें नौ तत्त्व भी कहा जाता है। इनमें पांचवा तत्त्व है - आश्रव। आश्रव वह तत्त्व जिससे पाप कर्मों का बंध तो होता ही है, पुण्य कर्मों के बंध में भी इसका योगदान होता है। पुण्य के बंध को एक बार छोड़ दें और हमें पाप के बंध पर विचार करना चाहिए। हिंसा करना, झूठ बोलना, चोरी करना ये सभी क्रमशः प्राणातिपात आश्रव, मृषावाद आश्रव व अदत्तादान आश्रव होते हैं। ये प्रवृत्यात्मक आश्रव हैं।
आश्रव संसार भ्रमण, जन्म-पुनर्जन्म का कारण है। इन आश्रवों को संवर के माध्यम से रोका जा सकता है, अतः संवर मोक्ष का कारण है। यह एक अहित् दर्शन है। व्यक्ति के पास यदि दर्शन का अधिक ज्ञान न भी हो तो एक सामान्य व्यक्ति को हिंसा, चोरी, झूठ से बचने का प्रयास करना चाहिए। किसी प्राणी को संकल्प पूर्वक कष्ट देने या मारने का मन में भाव आना बहुत खराब होता है। गृहस्थ जीवन के कार्यों में हिंसा हो सकती है परन्तु मारने का संकल्प करना अर्थात् संकल्पजा हिंसा से विशेष रूप से बचने का प्रयास करना चाहिए। व्यक्ति को जीवन में झूठ से भी बचना चाहिए। किसी को फंसाने के लिए मिथ्या आरोप लगाने आदि से बचना चाहिए। पूरी तरह झूठ नहीं बोलना चाहिए। इसी प्रकार चोरी से भी बचना चाहिए।
अतः गृहस्थ जीवन में व्यक्ति को हिंसा, झूठ और चोरी से बचने का प्रयास करना चाहिए। संवर की साधना जितनी पुष्ट होगी, आश्रव से उतना ही बचा जा रहा है। जीवन में संवर का विकास हो यह आत्मा के लिए श्रेयस्कर होता है। खोखर की जनता की ओर से सरपंच प्रतिनिधि जगदीश खोखर, विद्यालय के उपप्रधानाचार्य चुन्नाराम जी व सुरेश चन्द्रव्यास ने भी आचार्य प्रवर के स्वागत में भावाभिव्यक्ति दी।