‘कैसे बढ़े परिवार में आपसी सामंजस्य’ कार्यशाला का हुआ आयोजन

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गंगाशहर।

‘कैसे बढ़े परिवार में आपसी सामंजस्य’ कार्यशाला का हुआ आयोजन

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर के द्वारा आयोजित युवक -युवती कार्यशाला में ‘कैसे बढे़ परिवार में आपसी सामंजस्य’ विषय पर प्रवचन देते हुए उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि कमलकुमार जी स्वामी ने कहा कि परिवार में शान्ति का मूल मंत्र है दूसरों के गुणों को देखना। अच्छाईयों को देखना। दुसरो के गुणों को देखने से शान्ति मिलती है। किसी के अवगुण नही देखे। कोई बुराईयां हो तो सुधरवाने का प्रयास किया जा सकता है। अपनी कमियों को देखने का प्रयास करे, अपने अवगुणों को देखने का प्रयास करे। फिर उनमें सुधारने का प्रयास करे। उस परिवार में कलह, मन मुटाव, अशांति ज्यादा बढ़ती है जहाँ दूसरों की कमियों को देखा जाता है, अवगुणों को देखा जाता है। सारणा, वारणा, चोईरणा का सुत्र काम में लेना चाहिए। अच्छा कार्य करे उनकी प्रशन्सा, सहराना करनी चाहिए। गलती हो वहाँ सुधरवाने का प्रयास करे। अच्छे कार्य करने की प्रेरणा देना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि गुस्से की स्थिति में शांत रहने का प्रयास करे। शांत रहने वाला सिद्ध, बुध, मुक्त बन जाता है। परिवार में सास- बहु, पिता- पुत्र, भाई- भाई परिवार में विग्रह की स्थिति में, आपसी मन मुटाव की परिस्थितियों में आपस में प्रतिक्रिया नही करें, बड़ो का अपमान नही करें, छोटों के प्रति स्नेह भाव रखे। श्रम करना, नही छोड़े एक काहानी के माध्यम से परिवार में शांति कैसे बढ़े का मर्म समझाया। और मौन का महत्व बताया। कहा कि जो समय पर होठों को सीना जानता है, वो इस दुनिया में सुख से रहना जानता है। मुनि श्रेयांस कुमार जी स्वामी ने भी विषय की प्रासंगिकता के अनुसार गीतिका के माध्यम से जनता को परिवार में आपसी प्रेम, मधुरता से रहने का संदेश प्रदान किया।