जय जय जिनशासन

रचनाएं

साध्वी चित्रलेखा

जय जय जिनशासन

जय जय जिनशासन, जय भैक्षव शासन
जय जय अनुशासन, एकादश आसन
भीभाराज ममाडा का तुम गुरूवर महाश्रमण
एकादशमासन शोभे तुम्से गुरु महाश्रमण
यह संघ हमारा-2
तारणहारा सबका सबल सहारा।।
शासन-सुरतरू की छांव तले हम सुख-शय्या में सोते हैं,
संयम-तप-जप की मणियों का सुंदरतम हार पिरोते हैं।
शिखरों को छूले गण अपना, गण हित हम सबको है खपना
वात्सल्य विनय वर अनुशासन पहचान संघ की अनुपम है,
सुविधावादी स्वेच्छाधारी को लगता यह पथ दुर्गम है,
गुरू एकमात्र हैं अधिकारी, जग में फैली महिमा भारी।।
गुरू इंगित पर मर मिटने वाले स्वर्णांकित हो जाते हैं
आनाकानी करने वाले अपना वर्चस्व घटाते हैं,
देखें अतीत के पृष्ठ खोल, प्रेरित करते अनमोल बोल।।
अंतिम सांसों तक जुड़ी रहे गण गणपति से ही इकतारी
यश परिमल इसकी फैलाने में रहे प्रयास सदा जारी
आस्था वलयित हो पोर-पोर हम पाएंगे भव सिंघु घोर
मर्यादोत्सव की पृष्ठभूमि में वर्धमान उत्सव आता,
संतों सतियों का शुभागमन ही इस उत्सव का निर्माता,
बोरावड़ नगरी धन्य हुई, गुरु महाश्रमण की महर हुई।।
लय - मेरे देश की…