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आध्यात्मिक मंत्र आराधना अनुष्ठान का आयोजन
मकर संक्रांति पर्व के उपलक्ष में आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य डॉ मुनि पुलकित कुमारजी ठाणा 2 के मंगल सानिध्य में आध्यात्मिक विकास हेतु आत्मिक शांति मंत्र आराधना अनुष्ठान का आयोजन तेरापंथ सभा राजराजेश्वरी नगर बेंगलुरु में आयोजित हुआ। इस अवसर पर डॉ मुनि पुलकित कुमार जी ने कहा मकर संक्रांति का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है आज से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की तरफ तिल तिल रूप में बढ़ता जाता है। मुनिश्री ने अनुष्ठान आराधकों को प्रेरणा देते हुए कहा तिल में स्नेह होता है इसी तरह दिल में भी स्नेह भाव रहना चाहिए। गुड़ में मिठास होती है इसी तरह व्यक्ति के मुख में और व्यवहार में मिठास होनी चाहिए।
मकर संक्रांति त्योहार ठंडी की मौसम में आता है इसी तरह व्यक्ति का दिमाग भी ठंडा रहना चाहिए तभी वह सब का चहेता बन सकता है। परिवार में अड़ोस पड़ोस में जितना स्नेह भाव, जितनी मधुरता रहेगी उतना ही व्यक्ति क्लेश भावों से बचा रहेगा, क्रुरता भीतर में प्रवेश नहीं करेगी। शांतिपूर्वक जीवन जीने का यही मंगल मंत्र है। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार जी ने मंत्र आराधना करवाते हुए प्रेरणा प्रदान की। डॉ मुनिश्री ने ज्ञान केंद्र, शांति केंद्र, दर्शन केंद्र, ज्योति केंद्र, प्राणकेंद्र, आनंद केंद्र आदि शरीर के चैतन्य केंद्रों पर ध्यान करवाया एवं संकल्प युक्त विविध जैन मंत्रों की आराधना संपन्न करवाई। मनीष पगारिया ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।
तेरापंथी सभाध्यक्ष राकेश छाजेड़ ने सभी का स्वागत अभिनंदन किया। तेरापंथ महिला मंडल गांधीनगर मंत्री विजेता रायसोनी ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन आर आर नगर सभा मंत्री गुलाब बाँठिया ने किया। आभार ज्ञापन मीना डोसी ने किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की सहमंत्री मधु कटारिया, आदि अनेक श्रावक उपस्थित थे।