विनय, समर्पण और निष्काम भाव से होती रहे सेवा : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

छोटी खाटू। 23 जनवरी 2026

विनय, समर्पण और निष्काम भाव से होती रहे सेवा : आचार्यश्री महाश्रमण

माघ शुक्ला पंचमी।
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्म के मर्यादा महोत्सव के त्रिदिवसीय समारोह का प्रथम दिवस। जैन श्वेताम्बर तेरांपथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता भगवान महावीर के प्रतिनिधि, महातस्पवी युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी विशाल मंच के मध्य विराजमान हुए। आचार्य प्रवर ने मंगल महामंत्रोच्चार के साथ जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव के त्रिदिवसीय कार्यक्रम के शुभारंभ की घोषणा की। मुनिश्री दिनेशकुमारजी की अगुवाई में चतुर्विध धर्मसंघ ने जय घोष करते हुए ‘मर्यादा गीत’ का संगान किया। आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मर्यादा के आधारभूत ‘मर्यादाओं का उत्सव हम आज मनाएंगे’ गीत का संगान किया। तदुपरान्त साध्वी वृंद की ओर से साध्वी मुदितयशाजी ने और संतवृंद की ओर से मुनि कुमारश्रमण जी ने सेवा में नियोजित करने हेतु प्रार्थना की।
साध्वीवर्या संबुद्धयशाजी ने सेवा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए अपने उद्बोधन में कहां कि सेवा पूरे धर्मसंघ को एकता के धागे में बांधने वाला सशक्त सूत्र है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें तेरापंथ धर्मसंघ प्राप्त हुआ है, जिसे नंदनवन की उपमा से उपमित किया गया है। संघ में साधना करने वाले हर साधक को साधना के आनंद का अनुभव हो सके इसके लिए संध निरंतर प्रयत्नशील रहता है। यह आदि-व्याधि को हरने वाला और समाधि प्रदान करने वाला विशिष्ट धर्मसंघ है। तेरापंथ धर्मसंघ की सेवा विलक्षण है। हम सबमें अहंकार और ममकार विगलित होना जोए और निर्जरा की उत्कृष्ट भावना से हम सेवा भावना को जीवन में विकसित करते रहें।
इसी बीच युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेन्द्र सिंह शेखावत उपस्थित हुए उन्होंने आचार्यप्रवर की अभिवंदना में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ की आचार्य परंपरा के प्रति आस्था, सम्मान व श्रद्धा का भाव है जो मुझे यहां खींच लाया है। आज मर्यादा महोत्सव का प्रथम दिन है, जो सेवा के लिए निर्धारित है, जिसका संकल्प भी आपसे प्राप्त होगा। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि ऐसे महापर्व के दौरान आपके दर्शन का सु-अवसर मिला है। भारत की संस्कृति से पूरे विश्व को प्रेरणा मिलती है। आपकी सन्निधि से सेवा का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। आचार्य प्रवर ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि आज मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिन में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का आना हुआ है। कई राजनेता भी एकदम श्रावक जैसे आ जाते हैं। राजनीति भी सेवा का बहुत बड़ा क्षेत्र है। उसमें नैतिकता, धार्मिकता व शुद्धता बनी रहे।
मर्यादा महात्सव के प्रथम दिवस पर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चतुर्विध धर्मसंघ को पावन संबोध प्रदान करते हुए कहा कि आज का कार्यक्रम सेवा से संबंधित है। सेवा एक ऐसा तत्त्व है जो पुण्य बंध का एक कारण बन जाता है, जिससे पुण्य की ऊंची प्रकृति तीर्थंकर नाम गोत्र का बंध हो सकता है। हमारे धर्मसंघ की मान्यता है कि पुण्य का बंध निर्जरा के साथ होता है। सेवा कार्य को हम कर्म-निर्जरा के भाव से करें। सेवा विनय, समर्पण और निष्काम भाव से होती है तो वह सेवा बहुत शांति भी देनी चाहिए, जिससे चित समाधि रहे। हमारे धर्मसंध में सेवा का महत्त्व है और सेवा केन्द्रों की स्थापना होना एक सुंदर व्यवस्था है। हमारे जीवन में संयम की साधना हो और साथ में दूसरों की यथायोग्य सेवा करने का प्रयास हो तो जीवन काफी अच्छा रह सकता है। सेवा के अनेक क्षेत्र हो सकते हैं। जहां सेवा की बात हो तो मौके पर आगम स्वाध्याय आदि कार्यों को भी छोड़कर सेवा कार्य में जुड़ जाना चाहिए। सेवा करना बहुत बड़ी बात होती है।
पूज्य प्रवर ने तेरापंथ धर्मसंघ के सेवा केन्दों पर आगामी वर्ष में सेवादायी साध्वियों की नियुक्तियां की। तदुपरान्त आचार्य प्रवर ने साधु-साध्वियों, समणियों व मुमुक्षुओं सहित चतुर्विध धर्मसंघ को सेवा धर्म के प्रति जागरूक रहने और तन, मन व वचन से भी सेवा करते रहने की प्रेरणा प्रदान की। आचार्य प्रवर ने कहा कि सभी में सेवा की पुनीत भावना का विकास होना अपेक्षित है। मंगल प्रवचन के पश्चात् जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों ने आचार्य प्रवर के समक्ष ‘जयतिथि पत्रक’ लोकार्पित किया तथा मित्र परिषद ने तिथि दर्पण व तिथि पत्रक को आचार्यश्री के समक्ष अर्पित किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
अमृतवाणी के अध्यक्ष ललित कुमार दूगड़, आचार्य भिक्षु समाधि-स्थल सिरियारी के मर्यादा कोठारी, आचार्यश्री तुलसी शांति प्रतिष्ठान के दीपक आंचलिया, प्रेक्षाध्यान एकेडमी के भैंरूलाल चौपड़ा, प्रेक्षा इंटरनेशनल के अध्यक्ष अरविंद संचेती, जय तुलसी फाउण्डेशन की ओर से बाबूलाल सेखानी, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा सुनिता बेताला, दिव्या बेताला ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ कन्या मंडल ने अपनी प्रस्तुति दी। आचार्य प्रवर ने कन्या मंडल को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस के आयोजन का समापन आचार्य प्रवर के मंगल पाठ के साथ हुआ।