162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन

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सुजानगढ़

162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन

तेरापंथ सभा भवन में शासनश्री साध्वी सुप्रभा जी एवं साध्वी प्रमिला कुमारी जी के सानिध्य में 162वां मर्यादा महोत्सव मनाया गया। साध्वी मनीषाश्री जी ने मर्यादा महोत्सव को एक कहानी के माध्यम से समझाया। मर्यादा में रहकर कैसे जीवन जीया जाए। मर्यादा हमारा जीवन का मूल मंत्र है। संगठन,परिवार यह सभी में मर्यादा का अनुशासन होना जरूरी है। हम मर्यादा को लक्ष्मण रेखा भी बोल सकते हैं। मर्यादा में रहकर हम अपना और अपने संघ का विकास कर सकते हैं। साध्वी प्रमिला कुमारी जी ने एक प्रसंग के माध्यम से बताया कि हमारा यह धर्म संघ प्राणवान धर्म संघ है और कोई भी प्राणवान तभी बन सकता है जब हम एक दूसरे की सुनते हैं। शासन श्री साध्वी सुप्रभाजी ने कहा कि यह दिवस जयाचार्य की देन है और आचार्य भिक्षु ने संघ की मर्यादा को बांधा है। महापुरुष जितने भी जन्म लेते हैं उनका दिमाग कंप्यूटर की तरह होता है। अनेक मर्यादाओं का उन्होंने निर्माण किया हमारे ऊपर मर्यादा का छत्र रख दिया है। साधना और भावना से संघ का विकास होता है। मर्यादा पत्र का वाचन किया गया। सफल संयोजन साध्वी विज्ञप्रभा जी ने किया।