162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन

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राजमहेन्द्रवरम, आंध्रप्रदेश

162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि मोहजीत कुमार जी ठाणा 3 एवं मुनि हिमांशु कुमार जी ठाणा 2 के पावन सानिध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा, राजमहेन्द्रवरम द्वारा तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुनि मोहजीत कुमार जी ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा भारतीय संस्कृति के इतिहास में अनेक उत्सवों की श्रृंखला में तेरापंथ धर्म संघ का मर्यादा महोत्सव अपनी अलग पहचान बनायें हुए हैं। यह पर्व लौकिकता से पृथक अलौकिक भाव चेतना से जुड़ा है। यह उत्सव तेरापंथ धर्म संघ का महाकुंभ है। मर्यादा और अनुशासन की भाव धारा से बंधा हुआ यह महोत्सव एक गुरु और एक विधान के प्रति समर्पित है। आचार्य भिक्षु ने संगठित नेतृत्व को बहुत महत्व दिया। मुनि हिमांशु कुमार जी ने कहा मर्यादा तेरापंथ धर्मसंघ का प्राण है। आचार्य भिक्षु ने संघ के विकास के लिए कुछ मर्यादाओं का निर्धारण किया जो आज संघ के लिए सुरक्षा कवच हैं, संघ की डोर है। मुनि हेमंतकुमार जी ने जीवन मे मर्यादाओं के महत्व को उजागर किया। मुनि जयेश कुमार जी ने अपने वक्तव्य में तेरापंथ की मर्यादाओं का भारतीय संविधान के साथ तुलना करते हुए उनकी उत्कृष्टता को प्रकट किया। राजमहेन्द्रवरम सभा अध्यक्ष राजेश लोढा ने सभी का स्वागत अभिनंदन किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि भव्य कुमार जी ने किया।