संस्थाएं
162वें मर्यादा महोत्सव पर विविध आयोजन
भिक्षु साधना केन्द्र श्याम नगर में रविवार को श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का सर्वोच्च संघीय कार्यक्रम ‘मर्यादा महोत्सव’ का भव्य आयोजन हुआ। जिसमें आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य मुनि श्री तत्त्व रुचि जी'तरुण' एवं मुनि श्री संभव कुमार जी ने सान्निध्य प्रदान करते हुए अपने प्रेरक संदेश में कहा - मर्यादा कोई कानुन नहीं, कानून थोपा जाता है जबकि मर्यादाएं थोपी नहीं बल्कि स्वेच्छा से स्वीकार की जाती है। मुनि श्री जी ने कहा कि धार्मिक मर्यादाएं कोई बंधन नहीं हैं, ये तो बंधन मुक्ति का मार्ग है। मर्यादा से ही मर्यादा पुरुषोत्तम राम महान और भगवान बने। मुनि तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि - अनुशासन संगठन की रीढ़ है और विकास आधार है। बिना अनुशासन के कोई संगठन टिक नहीं सकता। साथ रहने के लिए मर्यादा व्यवस्था अनुशासन बहुत जरूरी है। शांति पूर्व सहवास और प्रगति का आधार है मर्यादा व्यवस्था और अनुशासन। मुनि संभव कुमार जी के कहा - किसिकी धार्मिक स्वतंत्रता में दखल देना उचित केसे हो सकता है? वास्तव में धर्म बल प्रयोग में नहीं, हृदय परिवर्तन में है। जीवन में वास्तविक बदलाव ह्रदय परिवर्तन या चेतना के रूपांतरण अथवा मस्तिष्कीय परिवर्तन से आता है। उन्होंने कहा - मर्यादा पालन के लिए मर्यादा के प्रति निष्ठा का जागरण जरूरी है। इस अवसर पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेन्द्र बांठिया ने कहा - मर्यादित व्यक्ति सम्माननीय बन जाता है। राजकुमार बरडिया ने गीत के साथ अपने वक्तव्य में कहा - तेरापंथी होना गौरव की अनुभूति होती है। ओमप्रकाश जैन ने कहा कि - मर्यादाओं का महोत्सव मनाने की परम्परा सिर्फ तेरापंथ में है।